मंगलवार, 11 दिसंबर 2007
11 नंबर की बस
खाया-पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारा आना। पिछले हफ्ते अपुन के साथ यइच हुआ। चम्मन चिरकुट की खोली पे जाने का प्लान था। उस दिन शादी बना रयेला था ना वो, तो सर्किट ने एक दिन पहले से इच प्लान बना लिया। अभी प्लान का मतलब बताता है अपुन तुमकू। नहीं, गिफ्ट विफ्ट तो हटेले लोग खरीदते हैं। शादी में जाने के वास्ते अपुन का प्लान का मतलब होता है एक दिन पहले फास्ट। बोले तो, चौबीस घंटे पहले नो खाना-पीना। पेट कू अपुन ढोल के माफिक खाली रखता है। शादी की पार्टी में चार दिन का डोज एक साथ इच ले लेता है। बाजू की बस्ती में चम्मन चिरकुट की खोली थी, इसका वास्ते सर्किट और अपुन ने ग्यारह नंबर की बस पकड़ी और चल दिए। अब ग्यारह नंबर की बस बोले तो एक जोड़ी अपुन और दूसरे जोड़ी सर्किट के पैर। बोले तो, पइसा बचाने के चक्कर में मोटर साइकल पे नहीं गये पन क्या मालूम था कि ग्यारह नंबर की बस का टिकट इत्ता महंगा पड़ेगा अपुन कू। मस्ती में रोड पे पहुंचे तो इत्ते सारे ट्रैफिक वाले मामू लोग फैले हुए थे, जइसे बस्ती में वीआईपी रूट लगेला हो। चम्मन चिरकुट इत्ता बड़ा आदमी हो गयेला है क्या? उसकी मैरिज में कोई वीआईपी आने वाला है क्या? यइच सोचते सोचते अपुन सर्किट के साथ जइसे इच रोड के बीचोंबीच पहुंचे तो एक मामू ने अपुन दोनों का कॉलर पकड़ लिया। दोनों के मुंह से एक साथ निकला, आई शप्पथ, हमने कुछ नहीं किया। भोत दिनों से धंधा पानी बंद है। वो बोला - गलत साइड से रोड क्रॉस कर रहे हो, निकालो 200 रुपये। सर्किट कू भोत खुन्नस चढ़ी। बोला, ऐ मामू! अपुन आगरा से नहीं आएला है। येड़ा समझा है क्या? लगता है सुबह से कोई हल्कट मिला नहीं, जो अपुन से बोनी कर रयेला है। मामू बोला - अरे रोड पे चलने की तमीज नहीं है और जबान लड़ाता है? जेब्रा क्रॉसिंग से रोड क्रॉस नहीं कर सकते थे क्या? फुटपाथ पे चलने में पैर में दर्द होता है? ये रोड में क्या पापा ने गार्डन बनाके दिया है जो मॉर्निंग वॉक करने आ गये? पेपर नहीं पढ़ते क्या, रोड पे ठीक से नहीं चलोगे तो फाइन होगा। मामू के इत्ते सारे सवाल सुनके अपुन कू भी भोत गुस्सा आया। बोले तो, पइसा बचाने के वास्ते बाइक से नहीं आए और ये पैदल चलने पर भी फाइन ठोक रयेला है। अपुन पूछता है कि फुटपाथ है किदर, जिसपे चलेगा। सरकार कू साइंटिस्ट लोग से बात करके हम गरीब लोग के पंख लगवाना मांगता है। रोड पे चलने का टेंशन इच खल्लास। इत्ती बकवास करके भी वो मामू खुश नहीं हुआ और पॉकेट में पड़े पइसे निकाल के चल दिया। उसके बाद अपुन दोनों की हिम्मत इच नहीं आगे बढ़ने की। मालूम नहीं, किदर चलने पे फाइन कटे और अबकी बार तो अपुन के पास पइसा भी नहीं बचा फाइन देने के वास्ते। शादी का प्लान कैंसल कर के उल्टे पैर खोली पे आ गये।
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