मंगलवार, 11 दिसंबर 2007
11 नंबर की बस
खाया-पिया कुछ नहीं, गिलास तोड़ा बारा आना। पिछले हफ्ते अपुन के साथ यइच हुआ। चम्मन चिरकुट की खोली पे जाने का प्लान था। उस दिन शादी बना रयेला था ना वो, तो सर्किट ने एक दिन पहले से इच प्लान बना लिया। अभी प्लान का मतलब बताता है अपुन तुमकू। नहीं, गिफ्ट विफ्ट तो हटेले लोग खरीदते हैं। शादी में जाने के वास्ते अपुन का प्लान का मतलब होता है एक दिन पहले फास्ट। बोले तो, चौबीस घंटे पहले नो खाना-पीना। पेट कू अपुन ढोल के माफिक खाली रखता है। शादी की पार्टी में चार दिन का डोज एक साथ इच ले लेता है। बाजू की बस्ती में चम्मन चिरकुट की खोली थी, इसका वास्ते सर्किट और अपुन ने ग्यारह नंबर की बस पकड़ी और चल दिए। अब ग्यारह नंबर की बस बोले तो एक जोड़ी अपुन और दूसरे जोड़ी सर्किट के पैर। बोले तो, पइसा बचाने के चक्कर में मोटर साइकल पे नहीं गये पन क्या मालूम था कि ग्यारह नंबर की बस का टिकट इत्ता महंगा पड़ेगा अपुन कू। मस्ती में रोड पे पहुंचे तो इत्ते सारे ट्रैफिक वाले मामू लोग फैले हुए थे, जइसे बस्ती में वीआईपी रूट लगेला हो। चम्मन चिरकुट इत्ता बड़ा आदमी हो गयेला है क्या? उसकी मैरिज में कोई वीआईपी आने वाला है क्या? यइच सोचते सोचते अपुन सर्किट के साथ जइसे इच रोड के बीचोंबीच पहुंचे तो एक मामू ने अपुन दोनों का कॉलर पकड़ लिया। दोनों के मुंह से एक साथ निकला, आई शप्पथ, हमने कुछ नहीं किया। भोत दिनों से धंधा पानी बंद है। वो बोला - गलत साइड से रोड क्रॉस कर रहे हो, निकालो 200 रुपये। सर्किट कू भोत खुन्नस चढ़ी। बोला, ऐ मामू! अपुन आगरा से नहीं आएला है। येड़ा समझा है क्या? लगता है सुबह से कोई हल्कट मिला नहीं, जो अपुन से बोनी कर रयेला है। मामू बोला - अरे रोड पे चलने की तमीज नहीं है और जबान लड़ाता है? जेब्रा क्रॉसिंग से रोड क्रॉस नहीं कर सकते थे क्या? फुटपाथ पे चलने में पैर में दर्द होता है? ये रोड में क्या पापा ने गार्डन बनाके दिया है जो मॉर्निंग वॉक करने आ गये? पेपर नहीं पढ़ते क्या, रोड पे ठीक से नहीं चलोगे तो फाइन होगा। मामू के इत्ते सारे सवाल सुनके अपुन कू भी भोत गुस्सा आया। बोले तो, पइसा बचाने के वास्ते बाइक से नहीं आए और ये पैदल चलने पर भी फाइन ठोक रयेला है। अपुन पूछता है कि फुटपाथ है किदर, जिसपे चलेगा। सरकार कू साइंटिस्ट लोग से बात करके हम गरीब लोग के पंख लगवाना मांगता है। रोड पे चलने का टेंशन इच खल्लास। इत्ती बकवास करके भी वो मामू खुश नहीं हुआ और पॉकेट में पड़े पइसे निकाल के चल दिया। उसके बाद अपुन दोनों की हिम्मत इच नहीं आगे बढ़ने की। मालूम नहीं, किदर चलने पे फाइन कटे और अबकी बार तो अपुन के पास पइसा भी नहीं बचा फाइन देने के वास्ते। शादी का प्लान कैंसल कर के उल्टे पैर खोली पे आ गये।
सोमवार, 26 नवंबर 2007
ये इंडिया का क्रिकेट है...
अपुन संडे का वेट पूरे एक वीक से कर रयेला था। नहीं, अपुन के धंधे में कोई संडे फन डे नहीं होता। काम पे जाने के वास्ते संडे कू अक्खा दिल्ली की रोड मस्के के माफिक चिकनी मिलती है ना, इसके वास्ते अक्खा वीक अपुन संडे का वेट करता है। पन ये संडे तो अपुन की वाट लग गई। बोले तो धंधे को बाजू में रखके कोटला में मैच देखने का प्लान बना डाला था। बस यइच गलती से मिस्टेक हो गई। सर्किट जब भी अपने भेजे कू काम पे लगाता है, अपुन दोनों की वाट लगती है। सचिन का भोत बड़ा फैन है ना वो।
खोली से जल्दी निकलने के चक्कर में अपुन दोनों ने पेट पूजा भी नहीं की। रोड तो खाली मिली पन स्टेडियम के पास जाके भेजे में घुसा कि ये इंडिया का क्रिकेट है भीड़ू। बोले तो जित्ता महंगा टिकट नहीं था, उससे जास्ती रोकड़ा अपुन कू खटारा कार की पार्किंग में ढ़ीला करना पड़ा। सर्किट के भेजे का बल्ब जला तो उसने बोला कि स्टेडियम के बाजू में बड़े-बड़े ऑफिस की पार्किंग में गाड़ी पार्क करते हैं। उदर दस रुपल्ली में अक्खा दिन का काम हो जाएंगा। पन उदर जाके मालूम चला कि ये इंडिया का क्रिकेट है भीड़ू। पार्किंग वाला बोला मैच देखने के वास्ते आयेला है तो निकाल 200 रुपल्ली। ये सुनके दिमाग का दही हो गया। अपुन ने उसकू बोला - ऐ मामू, तेरेकू क्या लगता है? अपुन आगरे से आयेले हैं क्या?
वो बोला - देखो अभी दोपहर हो गयेली है, मैच खल्लास होने में पूरे दो घंटे हैं। गाड़ी पार्क करनी है तो बोल नहीं तो पतली गली से कल्टी हो जा। दूसरी गाड़ी आ गई ना, तो ये 200 वाली पार्किंग थोड़ी देर में तेरेकू 300 की पड़ेगी।
सर्किट गुस्से में बोला - ओ शाणे, दस रुपये की पार्किंग के बदले 300 काइकू देगा? सिरदर्द की दवाई का साइड इफेक्ट हो गयेला है क्या?
पार्किंग वाला बोला - वो टीवी पे ऐड नहीं देखा क्या, ये इंडिया का क्रिकेट है भीड़ू। देखना है तो पइसा ढ़ीला करो, वरना...। वइसे भी, तुम कइसा क्रिकेट फैन है? सचिन कू बैटिंग करते देखने के वास्ते 200 रुपया ढ़ीला नहीं कर सकता? इत्ता बड़ा स्टार क्रिकेटर तुम्हारे सामने जलवा दिखाएगा और तुम 200 रुपये के वास्ते रो रयेला है? सचिन पे तो अक्खा पर्स कुरबान करती है पब्लिक। वइसे भी अपुन पब्लिक का थोबड़ा देखके रेट बोल रयेला है। तुम्हारे जइसे फुकेले बम के माफिक लोगों के वास्ते यइच रेट रखेला है। साउथ दिल्ली का कोई चिकना छोकरा होता ना, तो 500 से कम नहीं लेता। अब टाइम खोटी नहीं करने का, पइसा देना है तो बात करो।
26-11-2007
खोली से जल्दी निकलने के चक्कर में अपुन दोनों ने पेट पूजा भी नहीं की। रोड तो खाली मिली पन स्टेडियम के पास जाके भेजे में घुसा कि ये इंडिया का क्रिकेट है भीड़ू। बोले तो जित्ता महंगा टिकट नहीं था, उससे जास्ती रोकड़ा अपुन कू खटारा कार की पार्किंग में ढ़ीला करना पड़ा। सर्किट के भेजे का बल्ब जला तो उसने बोला कि स्टेडियम के बाजू में बड़े-बड़े ऑफिस की पार्किंग में गाड़ी पार्क करते हैं। उदर दस रुपल्ली में अक्खा दिन का काम हो जाएंगा। पन उदर जाके मालूम चला कि ये इंडिया का क्रिकेट है भीड़ू। पार्किंग वाला बोला मैच देखने के वास्ते आयेला है तो निकाल 200 रुपल्ली। ये सुनके दिमाग का दही हो गया। अपुन ने उसकू बोला - ऐ मामू, तेरेकू क्या लगता है? अपुन आगरे से आयेले हैं क्या?
वो बोला - देखो अभी दोपहर हो गयेली है, मैच खल्लास होने में पूरे दो घंटे हैं। गाड़ी पार्क करनी है तो बोल नहीं तो पतली गली से कल्टी हो जा। दूसरी गाड़ी आ गई ना, तो ये 200 वाली पार्किंग थोड़ी देर में तेरेकू 300 की पड़ेगी।
सर्किट गुस्से में बोला - ओ शाणे, दस रुपये की पार्किंग के बदले 300 काइकू देगा? सिरदर्द की दवाई का साइड इफेक्ट हो गयेला है क्या?
पार्किंग वाला बोला - वो टीवी पे ऐड नहीं देखा क्या, ये इंडिया का क्रिकेट है भीड़ू। देखना है तो पइसा ढ़ीला करो, वरना...। वइसे भी, तुम कइसा क्रिकेट फैन है? सचिन कू बैटिंग करते देखने के वास्ते 200 रुपया ढ़ीला नहीं कर सकता? इत्ता बड़ा स्टार क्रिकेटर तुम्हारे सामने जलवा दिखाएगा और तुम 200 रुपये के वास्ते रो रयेला है? सचिन पे तो अक्खा पर्स कुरबान करती है पब्लिक। वइसे भी अपुन पब्लिक का थोबड़ा देखके रेट बोल रयेला है। तुम्हारे जइसे फुकेले बम के माफिक लोगों के वास्ते यइच रेट रखेला है। साउथ दिल्ली का कोई चिकना छोकरा होता ना, तो 500 से कम नहीं लेता। अब टाइम खोटी नहीं करने का, पइसा देना है तो बात करो।
26-11-2007
बुधवार, 21 नवंबर 2007
है तो पी और बी हैपी
दोपहर हो गयेली थी और सर्किट है कि उठ इच नहीं रयेला था। मालूम नहीं रात कू कितनी बाटली गटक के सोयेला था। रोज तो ब्रेकफास्ट करने के चक्कर में जल्द उठ जाता था। आज मालूम नहीं क्या हुआ? पेट के चूहों कू छुट्टी मनाने के वास्ते कुल्लू मनाली भेज दियेला है क्या? या फिर रात कू कल्लू के ढाबे के डिनर में कुछ घपला था? एक दुलत्ती मार के अपुन ने उसकू उठाया तो आंख मसलते हुए बोला - क्या है मुन्नाभाई? काइकू सुबह-सुबह दिमाग का दही कर रयेले हो? सुबह-सुबह? लंच टाइम होने कू आया और तू इसे सुबह समझ रयेला है? अपुन ने एक और दुलत्ती दी तो फोल्डिंग खाट के साथ सर्किट भी पूरा फोल्ड हो गया। उठके बोला - भाई, अपुन जानबूझकर देर तक सो रयेला है। अपुन तो कहता है कि तुम भी थोड़ी देर आराम कर लो। टाइम कट जाएंगा। अपुन कू उसकी बात समझ में नहीं आई। टाइम काटने की जरूरत काइकू पड़ गई तेरेकू?
अपुन कू याद दिलाया - भाई, तुम्हारी मेमोरी भी लगता है कि दीवाली की छुट्टी मनाके अभी वापस नहीं लौटी है। तुम्हे तो अपुन कू थैंक्यू बोलना चाहिए। आज दगड़ू ढक्कन की हैपी मैरिज एनिवर्सरी है। उसने कल इच तो बोला था अपुन कू। अब मैरिज एनिवर्सरी की पार्टी तो अपुन उससे मांगेगा इच ना! इसका वास्ते अपुन जानबूझके सुबह नहीं उठा। देखो ना, तुम अपुन के ब्रेकफास्ट कू लेके टेंशन में रहता था ना? आज अपुन ने देर तलक सोके ब्रेकफास्ट और लंच दोनों का खर्चा बचा लिया है। शाम कू दगड़ू ढक्कन से पार्टी लेने का है न। सर्किट का हिसाब किताब अपुन भेजे में घुसाइच रयेला था कि उदर खोली का फाटक खोलके दगड़ू ढक्कन ने अइसे एंट्री मारी जइसे समंदर की लहरों के साथ मछली किनारे पे आ जाती है। सर्किट खाट से स्प्रिंग के माफिक उछलके बोला - अरे, दगड़ू भाई, तुम्हारी उमर भोत लंबी है। अभी अपुन तुमकू इच याद कर रयेले थे। हैपी एनिवर्सरी। सर्किट के साथ-साथ अपुन ने भी उसकू हैपी एनिवर्सरी विश किया तो वो उसका थोबड़ा अइसे लटक गया, जइसे किताबों के बोझ से स्कूल के बच्चों का बैग लटक जाता है। बोला - भाई, कभी किसी क्रिस्चन कू गुड फ्राइडे के दिन हैपी गुड फ्राइडे थोड़ी बोलते हैं और कभी किसी मुस्लिम कू मुहर्रम में हैपी मुहर्रम नहीं बोला जाता। एक तो वइसेइच अपुन की लाइफ की वाट लगेली है ऊपर से तुम हैपी एनिवर्सरी बोल रयेला है। अइसा बोलके दगड़ू तो खोली से कल्टी हो गया, सर्किट बेचारा अपुन का थोबड़ा देखता रह गया। अपुन ने उससे बोला कि दगड़ू कि हैपी एनिवर्सरी गई तबेले में। दिन का धंधा खोटी हो गयेला है। डिनर का भी जुगाड़ नहीं है। बी हैपी और दारू बची है तो पी और फिर से सो जा।
अपुन कू याद दिलाया - भाई, तुम्हारी मेमोरी भी लगता है कि दीवाली की छुट्टी मनाके अभी वापस नहीं लौटी है। तुम्हे तो अपुन कू थैंक्यू बोलना चाहिए। आज दगड़ू ढक्कन की हैपी मैरिज एनिवर्सरी है। उसने कल इच तो बोला था अपुन कू। अब मैरिज एनिवर्सरी की पार्टी तो अपुन उससे मांगेगा इच ना! इसका वास्ते अपुन जानबूझके सुबह नहीं उठा। देखो ना, तुम अपुन के ब्रेकफास्ट कू लेके टेंशन में रहता था ना? आज अपुन ने देर तलक सोके ब्रेकफास्ट और लंच दोनों का खर्चा बचा लिया है। शाम कू दगड़ू ढक्कन से पार्टी लेने का है न। सर्किट का हिसाब किताब अपुन भेजे में घुसाइच रयेला था कि उदर खोली का फाटक खोलके दगड़ू ढक्कन ने अइसे एंट्री मारी जइसे समंदर की लहरों के साथ मछली किनारे पे आ जाती है। सर्किट खाट से स्प्रिंग के माफिक उछलके बोला - अरे, दगड़ू भाई, तुम्हारी उमर भोत लंबी है। अभी अपुन तुमकू इच याद कर रयेले थे। हैपी एनिवर्सरी। सर्किट के साथ-साथ अपुन ने भी उसकू हैपी एनिवर्सरी विश किया तो वो उसका थोबड़ा अइसे लटक गया, जइसे किताबों के बोझ से स्कूल के बच्चों का बैग लटक जाता है। बोला - भाई, कभी किसी क्रिस्चन कू गुड फ्राइडे के दिन हैपी गुड फ्राइडे थोड़ी बोलते हैं और कभी किसी मुस्लिम कू मुहर्रम में हैपी मुहर्रम नहीं बोला जाता। एक तो वइसेइच अपुन की लाइफ की वाट लगेली है ऊपर से तुम हैपी एनिवर्सरी बोल रयेला है। अइसा बोलके दगड़ू तो खोली से कल्टी हो गया, सर्किट बेचारा अपुन का थोबड़ा देखता रह गया। अपुन ने उससे बोला कि दगड़ू कि हैपी एनिवर्सरी गई तबेले में। दिन का धंधा खोटी हो गयेला है। डिनर का भी जुगाड़ नहीं है। बी हैपी और दारू बची है तो पी और फिर से सो जा।
मंगलवार, 6 नवंबर 2007
शोएब बना मामू
उस दिन अपुन सुबह-सुबह इच उठ गया। जिस दिन सुबह जल्दी उठता है न , वो दिन भोत खराब बीतता है अपुन का। नींद भी खुली तो सर्किट के शोर से। बोले तो मोबाइल में नया प्लान लगाएला है न , फ्री टॉकटाइम वाला। बस अक्खा दिन किसी न किसी कू अडवाइस देता रहता है। आजकल अपुन की सुबह रोज उसके फोन के शोर से इच होती है।
उस दिन अपुन उठ तो गया जल्दी पन ब्रेकफास्ट करने के बाद अपुन का आंख फिर लग गया। इस बार फिर सर्किट के शोर से इच आंख खुली। वो अपुन कू उठा रयेला था। सुबह हो गई मामू , जल्दी रेडी हो जाओ , फिरोजशाह कोटला स्टेडियम जाने का है। बोले तो दगड़ू ढक्कन तो उदर सुबह से इच सीट घेर के बैठेला है। पाकिस्तान की टीम आएली है दिल्ली की टीम के साथ प्रैक्टिस करने के वास्ते। जास्ती भीड़ भी नहीं है स्टेडियम में। वइसे , स्टेडियम में मैच देखने का सपना तो अपुन बचपन से इच पाल के बैठेला था , पन आज तलक कभी चांस इच नहीं मिला। पन नींद छोड़के भीड़भाड़ में मैच देखने का आइडिया अपुन कू जमा नहीं। लेकिन सर्किट ने जब ये बताया कि एंट्री फोकट की है तो अपुन ने सोचा कि सर्किट पे अहसान कर इच डालते हैं। ढिनचैक रेडी होके अपुन दोनों बिंदास पौंच गये स्टेडियम। हाइला , ये क्या हो रयेला है ? दिल्ली की टीम के साथ मैच देखने के वास्ते भी इत्ती पब्लिक! स्टेडियम का शोर तो कानों में पड़ इच रयेला था , पन स्टेडियम के बाहर कम से कम बोले तो एक लाख पब्लिक तो खड़ी इच थी। सबकू अंदर जाने कू था। अंदर घुसने का कोई चांस नजर नहीं आ रयेला था। किसी तरह पुलिस कू टोपी पिन्हा के अपुन सर्किट के साथ अंदर घुस इच गया।
अंदर घुसते इच एक बार फिर अपुन दोनों के मुंह से कोरस में निकला - हाइला! ये क्या हो रयेला है ? कौन प्लेयर खेल रयेला है , कुछ मालूम नहीं चल रयेला था। टीवी पे बॉक्सर जइसे दिखने वाले पाकिस्तानी प्लेयर उदर अपुन के डेढ़ फुटिए के माफिक दिख रयेले थे। दो मिनट के अंदर भेजे में घुस गया कि खोली में टीवी के आगे बैठकर मैच देखने का जो मजा है , वो अक्खा वर्ल्ड में किदर भी नहीं है। अपुन दोनों मैच देखने के बजाय ट्रैजिडी किंग दिलीप कुमार के माफिक थोबड़ा बनाके बैठ गए। आई शप्पथ , इत्ता रिक्स उठाके अपुन दोनों इदर पौंचे और इदर इत्ती बड़ी टैजिडी।
तभीच अपुन कू पीछू से आवाज आई। हटो , रास्ता छोड़ो। हाइला , ये क्या! शोएब अख्तर जिम से बॉडी बनाके आ रयेला है। अपुन कू यकीन नहीं हुआ कि आंखों के आगे अपुन का फेवरिट स्टार अइसे खड़ा हो जाएंगा। तभीच अपुन के भेजे का बलब जला। सर्किट का फोन छीन के झट से शोएब का फोटू खींच लिया। इत्ते में शोएब आगे बढ़ गया और एक लेडी कॉन्स्टेबल की टोपी पहन के फोटू खिंचाने लगा। आई शप्पथ भोत जम रयेला था पुलिस की टोपी में। शोएब कू देखने के बाद अपुन दोनों स्टेडियम से बाहर गोविंदा छाप स्माइल लेके निकले।
पाकिस्तान का हैंगओवर अपुन के भेजे में अगले दिन तक था कि अचानक टीवी पे देखा पाकिस्तान में इमरजेंसी लग गयेली है। ये न्यूज सुनके अपुन के भेजे में सबसे पहले पाक क्रिकेट टीम का खयाल आया। सीरीज खेलकू क्या वो वापस जाएंगे या फिर इदर इच रह जाएंगे ? सर्किट बोला - भाई , काश अइसा हो जाता! अपुन की टीम और भी स्ट्रांग हो जाती। आइसीएल , आईपीएल... किसी न किसी में सबकू नौकरी मिल जाती। और जहां तक शोएब का सवाल है , उसकू दिल्ली पुलिस में भर्ती कर लेते। जवान की टोपी में भोत मस्त लगता है न वो।
उस दिन अपुन उठ तो गया जल्दी पन ब्रेकफास्ट करने के बाद अपुन का आंख फिर लग गया। इस बार फिर सर्किट के शोर से इच आंख खुली। वो अपुन कू उठा रयेला था। सुबह हो गई मामू , जल्दी रेडी हो जाओ , फिरोजशाह कोटला स्टेडियम जाने का है। बोले तो दगड़ू ढक्कन तो उदर सुबह से इच सीट घेर के बैठेला है। पाकिस्तान की टीम आएली है दिल्ली की टीम के साथ प्रैक्टिस करने के वास्ते। जास्ती भीड़ भी नहीं है स्टेडियम में। वइसे , स्टेडियम में मैच देखने का सपना तो अपुन बचपन से इच पाल के बैठेला था , पन आज तलक कभी चांस इच नहीं मिला। पन नींद छोड़के भीड़भाड़ में मैच देखने का आइडिया अपुन कू जमा नहीं। लेकिन सर्किट ने जब ये बताया कि एंट्री फोकट की है तो अपुन ने सोचा कि सर्किट पे अहसान कर इच डालते हैं। ढिनचैक रेडी होके अपुन दोनों बिंदास पौंच गये स्टेडियम। हाइला , ये क्या हो रयेला है ? दिल्ली की टीम के साथ मैच देखने के वास्ते भी इत्ती पब्लिक! स्टेडियम का शोर तो कानों में पड़ इच रयेला था , पन स्टेडियम के बाहर कम से कम बोले तो एक लाख पब्लिक तो खड़ी इच थी। सबकू अंदर जाने कू था। अंदर घुसने का कोई चांस नजर नहीं आ रयेला था। किसी तरह पुलिस कू टोपी पिन्हा के अपुन सर्किट के साथ अंदर घुस इच गया।
अंदर घुसते इच एक बार फिर अपुन दोनों के मुंह से कोरस में निकला - हाइला! ये क्या हो रयेला है ? कौन प्लेयर खेल रयेला है , कुछ मालूम नहीं चल रयेला था। टीवी पे बॉक्सर जइसे दिखने वाले पाकिस्तानी प्लेयर उदर अपुन के डेढ़ फुटिए के माफिक दिख रयेले थे। दो मिनट के अंदर भेजे में घुस गया कि खोली में टीवी के आगे बैठकर मैच देखने का जो मजा है , वो अक्खा वर्ल्ड में किदर भी नहीं है। अपुन दोनों मैच देखने के बजाय ट्रैजिडी किंग दिलीप कुमार के माफिक थोबड़ा बनाके बैठ गए। आई शप्पथ , इत्ता रिक्स उठाके अपुन दोनों इदर पौंचे और इदर इत्ती बड़ी टैजिडी।
तभीच अपुन कू पीछू से आवाज आई। हटो , रास्ता छोड़ो। हाइला , ये क्या! शोएब अख्तर जिम से बॉडी बनाके आ रयेला है। अपुन कू यकीन नहीं हुआ कि आंखों के आगे अपुन का फेवरिट स्टार अइसे खड़ा हो जाएंगा। तभीच अपुन के भेजे का बलब जला। सर्किट का फोन छीन के झट से शोएब का फोटू खींच लिया। इत्ते में शोएब आगे बढ़ गया और एक लेडी कॉन्स्टेबल की टोपी पहन के फोटू खिंचाने लगा। आई शप्पथ भोत जम रयेला था पुलिस की टोपी में। शोएब कू देखने के बाद अपुन दोनों स्टेडियम से बाहर गोविंदा छाप स्माइल लेके निकले।
पाकिस्तान का हैंगओवर अपुन के भेजे में अगले दिन तक था कि अचानक टीवी पे देखा पाकिस्तान में इमरजेंसी लग गयेली है। ये न्यूज सुनके अपुन के भेजे में सबसे पहले पाक क्रिकेट टीम का खयाल आया। सीरीज खेलकू क्या वो वापस जाएंगे या फिर इदर इच रह जाएंगे ? सर्किट बोला - भाई , काश अइसा हो जाता! अपुन की टीम और भी स्ट्रांग हो जाती। आइसीएल , आईपीएल... किसी न किसी में सबकू नौकरी मिल जाती। और जहां तक शोएब का सवाल है , उसकू दिल्ली पुलिस में भर्ती कर लेते। जवान की टोपी में भोत मस्त लगता है न वो।
रविवार, 4 नवंबर 2007
अक्खा दिन रोई दिल्ली
सर्किट और अपुन 2 दिन से खोली पे फुकेले बम के माफिक पड़ेले हैं। किदर भी हिलने-डुलने की हिम्मत नहीं हो रयेली है। बस्ती के किसी नए शाणे के डर के मारे नहीं, संडे कू जो अपुन दोनों की वाट लगी उसने अपुन दोनों की हवा निकाल दी। बोले तो संडे कू सुबह-सुबह उठके दोनों ने शप्पथ खाई थी कि मैराथन में भागेंगे। पन आई शप्पथ, ये शप्पथ तो भोत महंगी पड़ गई। सुबह से जो भागना शुरू किया तो रात तक भाग इच रयेले थे अपुन दोनों। बोले तो सुबह मैराथन ने भगाया। सर्किट तो पूरे ओवर कॉन्फिडेंस में खोली से निकला था। बोला, मुन्नाभाई अपुन बचपन में बस्ती की हर रेस में फर्स्ट आता था, ये तो वैसे भी हाफ मैराथन है। इसमें तो अपुन का गोल्ड मेडल पक्का इच समझो। सर्किट का ये जोश अपुन ने पहले कभी नहीं देखा था। इत्ते में बाजू की खोली से कल्लू कचरा आया और उसने सीक्रेट खोला तो भेजे में घुसा। बोले तो हाफ मैराथन में सर्किट की फेवरिट हीरोइन प्रियंका चोपड़ा आ रयेली है। पब्लिक कू चीयर अप करने के वास्ते। इस न्यूज कू सुनके सर्किट कई दिनों से चीयर अप हो रयेला था, ये बात अपुन के भेजे में काइकू नहीं घुसी। ओह अब सारी पिच्चर सर्किट के भेजे के माफिक अपुन के आंखों के आगे साफ-साफ तैर रयेली है। हाफ मैराथन में दौड़ने के वास्ते ये एक रात पहले से इच हाफ पैंट पहन के काइकू सो गया था। सुबह उठके लेट नहीं होना मांगता है न भाई। यइच बोलके अपुन कू टोपी पिन्हाया था सर्किट ने रात कू। अपुन मासूम उसकी बात में आ गया और संडे की छुट्टी का बाजा बजाने के वास्ते रेडी हो गया। वइसे सर्किट तो सोच रयेला था कि सुबह प्रियंका चोपड़ा के दर्शन करेगा और शाम कू उसके सपने लेगा पन सुबह हाफ मैराथन में हांफ हांफ के हाफ रूट भी कवर नहीं कर पाया सर्किट। अपने बारे में अपुन कू कोई गलतफैमिली नहीं था। अपुन तो कभी फर्स्ट आया नहीं था मोहल्ले की रेस में। हाफ मैराथन कू हाफ में इच छोड़के दोनों रोड के बाजू में बुझेली तीली के माफिक गिर गए। आंख खुली तो सीन देखके हैरान। दोपहर हो गयेली है और हाफ मैराथन अभी तलक चालू। सर्किट ने आंख से कीचड़ साफ किया और बोला-भाई ये तो फुल मैराथन दिख रयेली है। पब्लिक के हाथ में झंडे किदर से आ गये। अपुन ने भी देखा, हाफ मैराथन में ट्रैक सूट वाली पब्लिक बाद में धोती और साड़ी में कइसे चेंज हो गयेली है। तभीच पीछू से ट्रैफिक मामू का डंडा पड़ा। इदर से कल्टी हो जाओ। किसान लोग की रैली जा रही है। अपुन दोनों ने बाइक उठाई बाहर निकलने के वास्ते। पन इदर से बाहर निकलेंगे कइसे। ये रास्ता बंद, इदर से नहीं जाने का, उदर से नहीं जाने का...। अरे तो बाहर कइसे निकलें। मामू ने ये तो बोल दिया कि बाहर निकलो पन कल्टी मारने का रास्ता किदर से है, ये नहीं बताया। अपुन दोनों ने एक इच रास्ते के इत्ते चक्कर काटे की दोपहर से रात हो गई। इदर अपुन दोनों की एनर्जी खल्लास, उदर बाइक का पेट्रोल खल्लास। पेट्रोल भरा के खोली कू निकल रयेले थे पन गॉड कू मंजूर नहीं था। खोली के बाहर मंदिर के आगे करवा चौथ के वास्ते मेहंदी लगाने वाली लेडीज लोग ने ट्रैफिक जाम लगा के रखा था। इत्ती भीड़ देखके अपुन दोनों उदरइच फुकेले बम के माफिक ढेर हो गए।
28 october 2007, Half marathon and Janadesh rallies caused heavy trffic jam all around the delhi...
28 october 2007, Half marathon and Janadesh rallies caused heavy trffic jam all around the delhi...
सोमवार, 22 अक्टूबर 2007
रावण का एनकाउटर.... इमपॉसिबल
दो-तीन दिन से सर्किट खोली में दुबक के बैठेला है। जइसे पटाखे की आवाज सुनके गली के कुत्ते दुम दबाके कोने में छिप जाते हैं न, एकदम वइसे इच। अपुन ने पूछा - क्या हो गया है तेरेकू? अभी तो दीवाली भोत दूर है। बोले तो पटाखे का शोर तो अभी स्टार्ट भी नहीं हुआ, तू अभी से काइकू खाली-पीली खौफ खा रयेला है? वो बोला - मुन्ना भाई अपुन कू पटाखे का नहीं, एनकाउंटर का डर सता रयेला है। एनकाउंटर? अपुन ने पूछा कि ये एनकाउंटर वर्ड तेरे भेजे में किदर से आ गयेला है? राम गोपाल वर्मा की नई पिच्चर आ रयेली है क्या? वइसे रामू की आग देखने के बाद अपुन कू भी उसकी पिच्चर देखने से अब डर लगने लगा है पन एनकाउंटर पिच्चर के बारे में तो अपुन ने अभी तलक किसी चैनल में नहीं देखा। वो डरते डरते बोला - नहीं भाई, अपुन सच्ची के एनकाउंटर के बारे में बोल रयेला है। अपुन कू दशहरा के दिन से इच एनकाउंटर वर्ड का डर सता रयेला है। बोले तो दिल्ली की पब्लिक के मूड का कोई भरोसा नहीं है। अक्खा वर्ल्ड का क्राइम खल्लास करने के वास्ते कसम खाके बैठेली है। अपुन ने देखा था, दशहरा के दिन कोई ब्लूलाइन का रावण फूंक के एनकाउंटर कर रयेला था तो कोई अक्खा बुराई कू खतम करने का कसम खा रयेला था। लगता है, जइसे अक्खा विलेन लोग के पीछू पड़ गयेली है पब्लिक। सबकू खल्लास करके इच दम लेगी। अपुन भी नहीं बचेंगा। तुम भी बाजू के कमरे में छिप के बैठ जाओ मुन्ना भाई। बाहर निकलने में भोत डेंजर है। सर्किट का नॉन स्टॉप टेप जब खतम हुआ तो अपुन ने उसकू तसल्ली देना स्टार्ट किया। देख सर्किट, तू खाली-पीली डर रयेला है। ये दिल्ली है दिल्ली। न तो पब्लिक तेरेकू खल्लास कर सकती है और न इदर की पुलिस। तू भूल गयेला है क्या अपुन के धंधे में एनकाउंटर हर बार गलत आदमी का होता है। दिल्ली पुलिस के दस साल पुराने एनकाउंटर कू याद कर। मारना था किसी कू और खल्लास किसी और कू करके आ गये पुलिस वाले। इनकू अगर गलत आदमी का एनकाउंटर करना आता ना, तो रावण कब का मर गया होता! एक बार भगवान राम ने असली रावण का एनकाउंटर किया था लेकिन अब पब्लिक हर साल उस रावण का एनकाउंटर करने के चक्कर में मालूम नहीं किसकू उड़ा देती है। अगर असली रावण का एनकाउंटर करना इन लोग कू आता तो फिर ये हर साल काइकू रावण कू खल्लास करने के नाम पे इत्ता खर्चा करते। असली रावण कभी नहीं मरेंगा। ये बात अच्छी तरह समझ ले। अपुन जइसे रावण लोग जब इनकी पकड़ में आते हैं न तो उनका ये लोग कभी एनकाउंटर कर इच नहीं सकते। कित्ते सारे रावण जेल में सालों से बंद हैं। मालूम नहीं कित्ते साल तलक तो कोर्ट में केस चलता है। बोले तो कानून के घपले का फायदा कइसे उठाना है, ये इस देश के रावण लोग कू अच्छी तरह मालूम है। इसलिए डरने का नहीं, असली रावणों का कभी कोई एनकाउंटर नहीं कर सकता।
(दशहरा-2008 पर, कुछ दिन पहले ही सीपी एनकाउंटर केस पर अदालत ने दिल्ली पुलिस के 10 लोगों को कसूरवार ठहराया है)
(दशहरा-2008 पर, कुछ दिन पहले ही सीपी एनकाउंटर केस पर अदालत ने दिल्ली पुलिस के 10 लोगों को कसूरवार ठहराया है)
मंगलवार, 16 अक्टूबर 2007
सर्किट की कसम कब होगी भसम
मालूम नहीं, ये क्रिकेट टीम कब तक अपुन जइसे फैन्स की इज्जत का फलूदा बनाती रहेगी! फुकेले बम के माफिक मैदान में फुस्स! अपुन के भेजे में ये नहीं घुस रयेला है कि जब इन लोग कू सीरीज हारना इच था तो फिर इत्ते दिन तलक काइकू खींचा! एक मैच जीत के तीन हार गयेले थे तो उसी लाइन में एक और हार जाने का था ना! एक-एक करके 2 और मैच जीतने का क्या जरूरत था? अक्खा देश की पब्लिक का टाइम खोटी किया, सबका ब्लडप्रेशर बढ़ाया, मालूम नहीं कित्ती पब्लिक का हार्ट फेल हुआ होगा लास्ट मैच में इनकी परफॉर्मेन्स देख के। अपुन की बात सुनके सर्किट बोला- पन मुन्ना भाई, सारा फॉल्ट टीम का नहीं है। बोले तो गॉड ने अपुन की टीम के साथ चीटिंग कियेला है। एक तो वइसेइच टीम कू ग्रहण लगा रहता है, ऊपर से वो अंपायर भी इंडियन टीम का दुश्मन निकला। उसने सचिन कू गलत आउट दिया। अपुन कू तो लगता है कि इंडिया कू हराके वो फिर से गुलाम बनाना चाहता है। टीम के सड़ेले गेम से अपुन दुखी तो था पन ये मालूम नहीं था कि इस हटेले सर्किट के भेजे का फ्यूज इत्ता फुक गयेला है। अपुन ने उसकू बताया कि अइसा फर्स्ट टाइम नहीं हुआ है। अंपायर कू उस टाइम पे जो बात ठीक लगता है वोइच फैसला लेना मांगता है। वइसे वो भी एक इंसान इच तो है। कई बार अंपायर के अइसे फैसले की वजह से इंडियन टीम कू जीतने कू भी मिला है। तब तो अंपायर के बारे में कोई बात नहीं करता। कभी उसकी कंप्लेंट नहीं करता। इस बार अपुन की टीम हार गई तो अक्खा फॉल्ट अंपायर के सिर पे काइकू डाल रयेला है। वइसे भी तू इच बता, अक्खा टीम में खाली सचिन इच तो नहीं है। इत्ते सारे प्लेयर हैं। वो भी तो बैट घुमाना जानते थे पन सब के सब बुझेली तीली के माफिक लग रयेले थे। सबसे बड़ा विलेन अंपायर नहीं है, ये बात तेरे भेजे में कइसे घुसेंगी। वइसे भी इत्ता इमोशनल होके इंडियन टीम का मैच नहीं देखने का क्या? सर्किट बोला भाई, इमोशनल होके क्या, आज से तो अपुन कसम खाता है कि कभी क्रिकेट का मैच नहीं देखेगा। हॉकी और फुटबॉल की टीम इत्ता अच्छा खेल रयेली है, बस अपुन के वास्ते तो अब क्रिकेट खल्लास। अपुन बोला, सर्किट अइसी कसम मत खा, जिसकू तू अभीच तोड़ दे। तेरे जइसा क्रिकेट फैन कभी क्रिकेट मैच छोड़ इच नहीं सकता। वो बोला, नहीं भाई अपुन की ये कसम पक्की है। अपुन ने बोला कि ठीक है अगर ये बात है तो तू खोली से बाहर निकल। अपुन कू टीवी देखने का है। वो आज से ट्वेंटी-ट्वेंटी वर्ल्ड कप स्टार्ट हो रयेला है न। उसकू मिस नहीं करेंगा अपुन। वर्ल्ड कप की बात सुनते इच उसके फेस की ट्यूब लाइट जल गई और कसम को भसम करके टीवी रिमोट ढूंढने लगा।
50 का गेम 20 में खल्लास
ट्वेंटी 20 क्रिकेट अपुन कू जम गया, एकदम दही के माफिक। बोले तो अपुन कू तो अइसा लगता है कि जिसके भी भेजे में 20 ओवर के मैच का आइडिया आया होएंगा, वो दिल से इंडियन होगा। वर्ल्ड कप में इंडियन टीम का सड़ेला परफॉर्मेंस देख के इच उसने सोचा होएंगा कि पचास ओवर तक टीम की बेइज्जती खराब करने से तो अच्छा है कि बीस ओवर में इच गेम खल्लास करो। खुशी की बात ये है कि बीस ओवर के मैच कू सारे देश की टीम अइसे ले रयेली है जइसे पचास ओवर का गेम हो। कोई दस छक्के लगा रयेला है तो कोई बीस ओवर में 260 रन ठोक रयेला है। कोई सेंचुरी बना रयेला है तो कोई बीस बॉल में हाफ सेंचुरी ठोक रयेला है। अपुन की टीम भी वइसे कुछ कम नहीं है। पहले पच्चास ओवर में जइसा खराब खेलती थी, अभी भी वो स्टाइल मेनटेन कर रयेली है। वो तो गॉड ने बचा लिया स्कॉटलैंड से जो पहला मैच नहीं हुआ, वरना वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के माफिक हाल होता। आई शप्पथ, स्कॉटलैंड के नाम से भी अपुन कू डर लगता है। ये भी गॉड की कृपा है कि टीम का कोई कोच नहीं है, नहीं तो स्कॉटलैंड से मैच के बाद एक और मर्डर मिस्ट्री पैदा हो जाती, जिसकी गुत्थी कोई जेम्स बॉन्ड नहीं सुलझा पाता। वूल्मर मर्डर के बाद वाला सस्पेंस अभी तलक खल्लास नहीं हुआ है। पाकिस्तान के साथ मैच में भी गॉड ने अपुन की टीम का भोत हेल्प किया। वइसे टीम तो अपने पुराने स्टाइल से हारने के इरादे से इच मैदान में उतरी थी। प्लेयर लोग ने अपनी साइड से हारने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। साइकल स्टैंड के माफिक एक इच धक्के में सब के सब गिरने कू रेडी थे। स्कोर भी अब तलक का सबसे कम। फिर बॉलिंग की बारी आई तो पाक टीम कू जिताने के वास्ते पूरी हेल्प भी की। मालूम नहीं लास्ट बॉल में कइसे चूक हो गई और मैच टाई हो गया। वो तो भला हो उस आदमी का जिसने टी20 गेम के रूल बनाएले हैं। इंडिया की बेइज्जती खराब होने से बचाने के वास्ते क्रिकेट में फुटबॉल का रूल ठोक डाला। ताकि अपुन की नाक कू कोई भी सूर्पनखा समझ के काट न दे। बोल आउट में सहवाग से बॉलिंग कराके एक बार फिर टीम ने अपना रेकॉर्ड मेनटेन करने की कोशिश की। इस बार गॉड ने फिर हेल्प किया। अपुन ने बाद में न्यूजपेपर में पढ़ा कि पाकिस्तान टीम के कैप्टन कू इस नए रूल के बारे में कुछ मालूम इच नहीं था। अब तुम इच बोलो कि अगर उसकू ये रूल मालूम होता तो क्या इंडिया का कोई चांस था? अपुन कू तो नहीं लगता। इसलिए अपुन तो इस नए क्रिकेट कू पैदा करने वाले का थैंक्यू करता है। पचास का गेम बीस में खल्लास करके अपुन की लाज बचा ली।
फोकट का लोचा
फुकेले बम के माफिक आजकल अपुन का भेजा भी फुक रयेला है। अपुन कू टेंशन में देखके सर्किट का टेप, प्ले का बटन दबाए बिनाइच चालू हो गया। वो अपुन के भेजे से भी जास्ती फुकेला गाना गाने लगा - जब कोई बात बिगड़ जाए, जब कोई मुश्किल पड़ जाए, उसके मूड कू देख के अपुन कू डर लगा तो अपुन ने बीच में टोक के पूछ डाला - सर्किट, ये गाना पूरा गाएंगा क्या? वो बोला मुन्ना भाई, पहले गाना सुनने का। फिर अक्खा जोर लगा के चीखा - जब कोई बात बिगड़ जाए, जब कोई मुश्किल पड़ जाए, तो तो तो तो ये पांच वर्ड बोलने का - ऐ गणपत, चल दारू ला। बोलो भाई, कइसा लगा अपुन का आइडिया? ये सड़ेला जोक सुन के दिल में तो आया कि उसका सर्किट फ्यूज कर दूं पन उससे अपुन के भेजे की प्रॉब्लम दूर थोड़ी होने वाली थी। उसकू बताया कि अपुन फोकट के लोचे में फंस गयेला है। अक्खा टेंशन की जड़ है ये मोबाइल फोन। चिंकी बोलती है अपुन कू रोज एसएमएस डालो वो भी कम से कम दस। ये वोइच चिंकी है जिसकू पटाने के वास्ते पहले दस क्या, मालूम नहीं कित्ते एसएमएस डालता था अपुन। बोले तो उस टाइम पे तो एसएमएस का रेट भी 3 रुपल्ली था। 3 रुपल्ली बोले तो एक कटिंग चाय, एक उबला अंडा, तंबाकू का एक पैकेट और 3 सिगरेट! सोचो, अपुन अक्खा वर्ल्ड की ऐश कर सकता था पन वो ये सब किदर समझती थी। अपुन का ये बलिदान उस टाइम में फोकट में वेस्ट हो रयेला था। पटने के भोत टाइम बाद वो अपुन कू बोली कि कोई और काम धंधा नहीं है क्या तुमकू? इत्ते एसएमएस नक्को डालने का। तुम्हारे पास भेजने का फोकट टाइम है तो तुम अपुन का टाइम काइकू खोटी करता है? अब तुम इच बोलो, पहले अपुन कू लुक्खा, फालतू और वो दिल्ली की लैंग्वेज में बोलते हैं न कि वेल्ला समझ रयेली थी और अब टाइम ने अइसा पलटी खाया। अपुन के पास रियली में टाइम नहीं है तो बोलती है कि अपुन कंजूस है। एक एसएमएस तक नहीं भेज सकता? अब तूइच बोल सर्किट, जो काम अपुन पहले करता था, उसके लिए वो अपुन कू वेल्ला का टाइटल देती थी और अब जब वो काम अपुन नहीं करता है तो कंजूस बोलके अपुन के दिमाग का दही कर रयेली है। है न फोकट का लोचा। तेरेकू तो मालूम इच है अभी अपुन का धंधा कित्ता मंदा चल रयेला है। इत्ता खर्चा किदर से उठाएंगा अपुन? सर्किट कू फर्स्ट टाइम अपुन ने सीरियस देखा। यकीन नहीं हुआ कि सर्किट सीरियस भी हो सकता है। एकदम ए. के. हंगल के माफिक थोबड़ा बनाके बोला - भाई अपुन के मोबाइल में आज इच एक एसएमएस की नई स्कीम आएली है। तुम वो इच स्कीम ले लो, टेंशन खल्लास! अपुन डर गया, उसके भेजे में एक स्कीम पक रयेली है। माफ कर, अपुन कू हजम नहीं होती तेरी स्कीम। एक गांधी बापू, बोले तो 5 सौ रुपल्ली का रिचार्ज कराने से दस साल की वैलिडिटी 5 हजार का टॉक टाइम और 50 हजार एसएमएस फ्री!!!! अपुन की आंखें मनोरमा के माफिक बाहर आ गई। अपुन ने सर्किट कू बड़े स्टाइल से बोला - ठीक है, आज इच चालू कर दे अपुन के फोन पे ये स्कीम। पन लगता है कि वो अपुन से किसी जनम का बदला ले रयेला था। बोला - भाई, ये स्कीम तो तुमकू खुद इच लगानी पड़ेगी। इसका वास्ते वेबसाइट खोलो - आगरा के पागलखाने से आयेला है क्या डॉट कॉम !!!!
मंगलवार, 9 अक्टूबर 2007
फोकट का अडवाइस
अपुन और अपुन की चारपाई...फीवर चढ़ता है तो अक्सर एक इच बात सोचते हैं। लाइफ में सोशल सर्कल जास्ती बड़ा नहीं होना चाहिए। बोले तो इदर तबियत डाउन, उधर अक्खा गैंग एक्टिव। सब के सब अपने भेजे की धूल कू झाड़-पोछ के सामने आ जाते हैं एक अडवाइस लेके। ये खाने का, वो नहीं खाने का...चलो इदर तलक बात हो तो चलता है। पन बस्ती के एक येड़े राजू कबाड़ी के बारे में अपुन तुमकू क्या बताए। इत्ता भंगार तो उसकी दुकान में भी नहीं है, जित्ता उसके भेजे में सड़ रयेला है। बोले तो, अडवाइस देने के लिए मुंह खोलता है तो अइसी अइसी मनहूस बातें मुंह से उगलता है जइसे बाजू की बस्ती का कूड़ेदान अक्खा टाइम बास उगलता है। ये कर ले, नहीं तो खाट पे लंबा पड़ जाएंगा, वो कर ले नहीं तो हाथ काटना पड़ेंगा... बोले तो उसकू इत्ती बार बोला, मामू गॉड ने तेरे कू अच्छी शकल नहीं दी तो कम से कम इस सड़ेले थोबड़े से बातें तो शुभ शुभ करना मांगता है। पन वो तो अइसा कसम खाके पैदा हुआ था कि जब भी मुंह खोलेगा तो मनहूस बोल बचन इच निकालेंगा। एक और शाणा है बस्ती में। टीवी पे ऐड देखके एक फोन लियेला है फोकट का। दिन और रात उसके वास्ते बरोबर है। येड़ा कभी भी अपुन का नंबर घुमा देता है। अपुन कू तो लगता है कि कंपनी ने उसी के वास्ते फोकट का फोन लॉन्च कियेला है। अपुन पूछता है कि तेरे फोकट के फोन के चक्कर में अपुन अपना कीमती भेजा काइकू खपाए। खाली-पीली बीमार आदमी का टाइम खोटी करने वाले से अपुन कू भोत नफरत है। अडवाइस देने से मन भर जाता है तो फिर फोकट के सवाल पूछ-पूछ के भेजा फ्राई करता है। शाणे की हिम्मत तो देखो। अपुन बीमार है, अपुन खोली की खाट पे खटमल के माफिक चिपकेला बैठा है और अपुन से इच बोलता है कि मुन्ना भाई, अपुन तुम से भोत नाराज है। क्या बात है, आजकल फोन नहीं करते हो? इत्ते दिन हो गयेले हैं, एक भी फोन नहीं किया। अरे, अपुन पूछता है कि बीमार अपुन है पन भेजा तेरा खाली हो रयेला है। इत्ता भी नहीं समझता कि बीमार आदमी आराम करेगा या फिर पब्लिक कू फोन घुमाता रहेगा। इस बीमार पे कुछ तो रहम खा। पन ये अडवाइस देने वाले और फोकट के सवाल पूछने वाले रहम किदर से खाएंगे। इनका पेट तो अपुन जइसे लोग का भेजा खाके भरता है न।
मंगलवार, 2 अक्टूबर 2007
नो भाईगीरी ओनली गांधीगीरी।
अपुन खाट पे खटमल के माफिक चिपक के लेटेला था। तभीच खोली के दरवाजे कू किसी ने डंडे से पीटा, एकदम अपुन के मकान मालिक के इश्टाइल में। पन खोली का भाड़ा तो अपुन ने कल इच दे डाला है। फिर सुबह सुबह कौन? अरे बापू! गांधी बापू पांच सौ के नोट में से निकल के अपुन की खोली में किदर से आया? बापू बोले - मुन्ना ये सवाल तो मुझे करना चाहिए। तू मुंबई छोड़ के दिल्ली क्यों आया। तुझसे तो मेरी मुलाकात मुंबई में हुई थी ना? अपुन बोला - बापू तुम बात तो एकदम ठीक कर रयेला है पन दिल्ली तो दिल्ली है। मालूम है, अपुन ने पेपर में पढ़ेला था कि दिल्ली अक्खा देश की नंबर वन सिटी है। इसका वास्ते अपुन और सर्किट मुंबई छोड़के दिल्ली में इच जम गयेले हैं। बोले तो अब ये दिल्ली तुम्हारे टाइम की दिल्ली नहीं है रे। उस टाइम तो क्या, ये दिल्ली में तो रोज रोज चेंज आ रयेले हैं। तुम इच बोलो, मुंबई में तो मालूम नहीं कित्ते सालों से बड़ी बड़ी बिल्डिंग हैं, उसके आगे भोत कम स्कोप है। पन दिल्ली में रोज नई बिल्डिंग, रोज नया फ्लाईओवर और रोज नया मॉल खुल रयेला है। बोले तो मुंबई से साइज में बड़ी है न। और एक टॉप सीक्रेट बात बताता है। अपुन जइसे लुक्खे लोग के वास्ते इदर स्कोप जास्ती है। उदर भाईगीरी करने वाले भोत शाणे हैं पन इदर अपुन का राज चलता है। ओ सॉरी बापू, भाईगीरी से अपुन कू तुम्हारी सिखाई गांधीगीरी याद आ गयेली है। अरे हां, तुमकू मालूम है बापू, गांधीगीरी के वास्ते तो ये जगह एकदम परफेक्ट है। बापू ने अपुन से पूछा - क्यों, यहां क्या वो लोग ज्यादा रहते है, वो, वो तुम्हारी भाषा में मामू लोग, जिन्हें ठीक करने के लिए गांधीगीरी की जरूरत पड़ती है। अपुन ने बापू कू बताया - नहीं रे बापू, अइसा नहीं है। मामू टाइप का आदमी तो अपुन कू अक्खा देश में कहीं भी मिल जाएगा। अपुन बात कर रयेला है गांधीगीरी के कोर्स की। इदर डीयू में गांधीगीरी पढ़ाने के वास्ते अक्खा कोर्स बनाएला है। भोत सारे स्टूडेंट लोग ने एडमिशन लियेला है उसमें। बोले तो गांधीगीरी कू भेजे में अच्छी तरह घुसाने के वास्ते स्टूडेंट लोग तुम्हारे गांव भी जाते हैं। अपुन की बात सुनके बापू भोत खुश हुआ फिर अपुन से बोला - लेकिन तुमने तो यहां आकर फिर से भाईगीरी शुरू कर दी है। अपुन ने समझाया - बापू, वो जिस दिन से तुम अपुन कू छोड़के गया है न, अपुन भोत टेंशन में था। अक्खा वर्ल्ड की पब्लिक अपुन कू पागल बोलने लगी थी। तुम तो अपुन से अइसा रूठा जइसे सावन रूठ के चला जाता है। और तब से अपुन की हालत किसान के माफिक हो गई थी, जिसके खेत सूख रयेले थे। और तो और अपुन के पर्स में एक गांधी का नोट तलक नहीं था। धंधा चौपट हो गया तो अपुन तुमकू ढूंढने के वास्ते दिल्ली आ गया। भोत दिन तक तुम्हारा वेट किया। तुम नहीं आया तो धंधा स्टार्ट किया। नोट आने लगे और नोट के अंदर तुम्हारा दर्शन भी हो गया। सब कुछ तुमकू पाने के वास्ते इच तो किया अपुन। अपुन का बहाना बापू कू पसंद नहीं आया और वो गायब हो गया। अपुन जोर से चिल्लाया - बापू, बापू सॉरी बोलताय अपुन। आगे से भाईगीरी नहीं, सिर्फ गांधीगीरी, आई शप्पथ। तभीच किसी ने जोर से खोली का दरवाजा ठोका और अंदर आ गया। अपुन ने आंख खोली तो सच्ची मुच्ची का लैंडलॉर्ड आयेला था, खोली का भाड़ा मांगने के वास्ते। अपुन ने उसकू बोला कि कल इच तो सर्किट के हाथ से चार करारे गांधी के नोट भेजेले थे। वो बोला - तू और तेरा सर्किट, कहीं दारूबाजी में उड़ा दिए होंगे। मुझे तो अभी दे नोट चार करारे गांधी बापू वाले। अपुन के दिल में तो आया कि उसकू एक कान के नीचे पिन्हा दूं पन फिर सपने में बापू से किया प्रॉमिस याद आ गया। नो भाईगीरी ओनली गांधीगीरी।
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