मंगलवार, 6 नवंबर 2007

शोएब बना मामू

उस दिन अपुन सुबह-सुबह इच उठ गया। जिस दिन सुबह जल्दी उठता है न , वो दिन भोत खराब बीतता है अपुन का। नींद भी खुली तो सर्किट के शोर से। बोले तो मोबाइल में नया प्लान लगाएला है न , फ्री टॉकटाइम वाला। बस अक्खा दिन किसी न किसी कू अडवाइस देता रहता है। आजकल अपुन की सुबह रोज उसके फोन के शोर से इच होती है।

उस दिन अपुन उठ तो गया जल्दी पन ब्रेकफास्ट करने के बाद अपुन का आंख फिर लग गया। इस बार फिर सर्किट के शोर से इच आंख खुली। वो अपुन कू उठा रयेला था। सुबह हो गई मामू , जल्दी रेडी हो जाओ , फिरोजशाह कोटला स्टेडियम जाने का है। बोले तो दगड़ू ढक्कन तो उदर सुबह से इच सीट घेर के बैठेला है। पाकिस्तान की टीम आएली है दिल्ली की टीम के साथ प्रैक्टिस करने के वास्ते। जास्ती भीड़ भी नहीं है स्टेडियम में। वइसे , स्टेडियम में मैच देखने का सपना तो अपुन बचपन से इच पाल के बैठेला था , पन आज तलक कभी चांस इच नहीं मिला। पन नींद छोड़के भीड़भाड़ में मैच देखने का आइडिया अपुन कू जमा नहीं। लेकिन सर्किट ने जब ये बताया कि एंट्री फोकट की है तो अपुन ने सोचा कि सर्किट पे अहसान कर इच डालते हैं। ढिनचैक रेडी होके अपुन दोनों बिंदास पौंच गये स्टेडियम। हाइला , ये क्या हो रयेला है ? दिल्ली की टीम के साथ मैच देखने के वास्ते भी इत्ती पब्लिक! स्टेडियम का शोर तो कानों में पड़ इच रयेला था , पन स्टेडियम के बाहर कम से कम बोले तो एक लाख पब्लिक तो खड़ी इच थी। सबकू अंदर जाने कू था। अंदर घुसने का कोई चांस नजर नहीं आ रयेला था। किसी तरह पुलिस कू टोपी पिन्हा के अपुन सर्किट के साथ अंदर घुस इच गया।

अंदर घुसते इच एक बार फिर अपुन दोनों के मुंह से कोरस में निकला - हाइला! ये क्या हो रयेला है ? कौन प्लेयर खेल रयेला है , कुछ मालूम नहीं चल रयेला था। टीवी पे बॉक्सर जइसे दिखने वाले पाकिस्तानी प्लेयर उदर अपुन के डेढ़ फुटिए के माफिक दिख रयेले थे। दो मिनट के अंदर भेजे में घुस गया कि खोली में टीवी के आगे बैठकर मैच देखने का जो मजा है , वो अक्खा वर्ल्ड में किदर भी नहीं है। अपुन दोनों मैच देखने के बजाय ट्रैजिडी किंग दिलीप कुमार के माफिक थोबड़ा बनाके बैठ गए। आई शप्पथ , इत्ता रिक्स उठाके अपुन दोनों इदर पौंचे और इदर इत्ती बड़ी टैजिडी।

तभीच अपुन कू पीछू से आवाज आई। हटो , रास्ता छोड़ो। हाइला , ये क्या! शोएब अख्तर जिम से बॉडी बनाके आ रयेला है। अपुन कू यकीन नहीं हुआ कि आंखों के आगे अपुन का फेवरिट स्टार अइसे खड़ा हो जाएंगा। तभीच अपुन के भेजे का बलब जला। सर्किट का फोन छीन के झट से शोएब का फोटू खींच लिया। इत्ते में शोएब आगे बढ़ गया और एक लेडी कॉन्स्टेबल की टोपी पहन के फोटू खिंचाने लगा। आई शप्पथ भोत जम रयेला था पुलिस की टोपी में। शोएब कू देखने के बाद अपुन दोनों स्टेडियम से बाहर गोविंदा छाप स्माइल लेके निकले।

पाकिस्तान का हैंगओवर अपुन के भेजे में अगले दिन तक था कि अचानक टीवी पे देखा पाकिस्तान में इमरजेंसी लग गयेली है। ये न्यूज सुनके अपुन के भेजे में सबसे पहले पाक क्रिकेट टीम का खयाल आया। सीरीज खेलकू क्या वो वापस जाएंगे या फिर इदर इच रह जाएंगे ? सर्किट बोला - भाई , काश अइसा हो जाता! अपुन की टीम और भी स्ट्रांग हो जाती। आइसीएल , आईपीएल... किसी न किसी में सबकू नौकरी मिल जाती। और जहां तक शोएब का सवाल है , उसकू दिल्ली पुलिस में भर्ती कर लेते। जवान की टोपी में भोत मस्त लगता है न वो।

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