सोमवार, 22 अक्टूबर 2007

रावण का एनकाउटर.... इमपॉसिबल

दो-तीन दिन से सर्किट खोली में दुबक के बैठेला है। जइसे पटाखे की आवाज सुनके गली के कुत्ते दुम दबाके कोने में छिप जाते हैं न, एकदम वइसे इच। अपुन ने पूछा - क्या हो गया है तेरेकू? अभी तो दीवाली भोत दूर है। बोले तो पटाखे का शोर तो अभी स्टार्ट भी नहीं हुआ, तू अभी से काइकू खाली-पीली खौफ खा रयेला है? वो बोला - मुन्ना भाई अपुन कू पटाखे का नहीं, एनकाउंटर का डर सता रयेला है। एनकाउंटर? अपुन ने पूछा कि ये एनकाउंटर वर्ड तेरे भेजे में किदर से आ गयेला है? राम गोपाल वर्मा की नई पिच्चर आ रयेली है क्या? वइसे रामू की आग देखने के बाद अपुन कू भी उसकी पिच्चर देखने से अब डर लगने लगा है पन एनकाउंटर पिच्चर के बारे में तो अपुन ने अभी तलक किसी चैनल में नहीं देखा। वो डरते डरते बोला - नहीं भाई, अपुन सच्ची के एनकाउंटर के बारे में बोल रयेला है। अपुन कू दशहरा के दिन से इच एनकाउंटर वर्ड का डर सता रयेला है। बोले तो दिल्ली की पब्लिक के मूड का कोई भरोसा नहीं है। अक्खा वर्ल्ड का क्राइम खल्लास करने के वास्ते कसम खाके बैठेली है। अपुन ने देखा था, दशहरा के दिन कोई ब्लूलाइन का रावण फूंक के एनकाउंटर कर रयेला था तो कोई अक्खा बुराई कू खतम करने का कसम खा रयेला था। लगता है, जइसे अक्खा विलेन लोग के पीछू पड़ गयेली है पब्लिक। सबकू खल्लास करके इच दम लेगी। अपुन भी नहीं बचेंगा। तुम भी बाजू के कमरे में छिप के बैठ जाओ मुन्ना भाई। बाहर निकलने में भोत डेंजर है। सर्किट का नॉन स्टॉप टेप जब खतम हुआ तो अपुन ने उसकू तसल्ली देना स्टार्ट किया। देख सर्किट, तू खाली-पीली डर रयेला है। ये दिल्ली है दिल्ली। न तो पब्लिक तेरेकू खल्लास कर सकती है और न इदर की पुलिस। तू भूल गयेला है क्या अपुन के धंधे में एनकाउंटर हर बार गलत आदमी का होता है। दिल्ली पुलिस के दस साल पुराने एनकाउंटर कू याद कर। मारना था किसी कू और खल्लास किसी और कू करके आ गये पुलिस वाले। इनकू अगर गलत आदमी का एनकाउंटर करना आता ना, तो रावण कब का मर गया होता! एक बार भगवान राम ने असली रावण का एनकाउंटर किया था लेकिन अब पब्लिक हर साल उस रावण का एनकाउंटर करने के चक्कर में मालूम नहीं किसकू उड़ा देती है। अगर असली रावण का एनकाउंटर करना इन लोग कू आता तो फिर ये हर साल काइकू रावण कू खल्लास करने के नाम पे इत्ता खर्चा करते। असली रावण कभी नहीं मरेंगा। ये बात अच्छी तरह समझ ले। अपुन जइसे रावण लोग जब इनकी पकड़ में आते हैं न तो उनका ये लोग कभी एनकाउंटर कर इच नहीं सकते। कित्ते सारे रावण जेल में सालों से बंद हैं। मालूम नहीं कित्ते साल तलक तो कोर्ट में केस चलता है। बोले तो कानून के घपले का फायदा कइसे उठाना है, ये इस देश के रावण लोग कू अच्छी तरह मालूम है। इसलिए डरने का नहीं, असली रावणों का कभी कोई एनकाउंटर नहीं कर सकता।
(दशहरा-2008 पर, कुछ दिन पहले ही सीपी एनकाउंटर केस पर अदालत ने दिल्ली पुलिस के 10 लोगों को कसूरवार ठहराया है)

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2007

सर्किट की कसम कब होगी भसम

मालूम नहीं, ये क्रिकेट टीम कब तक अपुन जइसे फैन्स की इज्जत का फलूदा बनाती रहेगी! फुकेले बम के माफिक मैदान में फुस्स! अपुन के भेजे में ये नहीं घुस रयेला है कि जब इन लोग कू सीरीज हारना इच था तो फिर इत्ते दिन तलक काइकू खींचा! एक मैच जीत के तीन हार गयेले थे तो उसी लाइन में एक और हार जाने का था ना! एक-एक करके 2 और मैच जीतने का क्या जरूरत था? अक्खा देश की पब्लिक का टाइम खोटी किया, सबका ब्लडप्रेशर बढ़ाया, मालूम नहीं कित्ती पब्लिक का हार्ट फेल हुआ होगा लास्ट मैच में इनकी परफॉर्मेन्स देख के। अपुन की बात सुनके सर्किट बोला- पन मुन्ना भाई, सारा फॉल्ट टीम का नहीं है। बोले तो गॉड ने अपुन की टीम के साथ चीटिंग कियेला है। एक तो वइसेइच टीम कू ग्रहण लगा रहता है, ऊपर से वो अंपायर भी इंडियन टीम का दुश्मन निकला। उसने सचिन कू गलत आउट दिया। अपुन कू तो लगता है कि इंडिया कू हराके वो फिर से गुलाम बनाना चाहता है। टीम के सड़ेले गेम से अपुन दुखी तो था पन ये मालूम नहीं था कि इस हटेले सर्किट के भेजे का फ्यूज इत्ता फुक गयेला है। अपुन ने उसकू बताया कि अइसा फर्स्ट टाइम नहीं हुआ है। अंपायर कू उस टाइम पे जो बात ठीक लगता है वोइच फैसला लेना मांगता है। वइसे वो भी एक इंसान इच तो है। कई बार अंपायर के अइसे फैसले की वजह से इंडियन टीम कू जीतने कू भी मिला है। तब तो अंपायर के बारे में कोई बात नहीं करता। कभी उसकी कंप्लेंट नहीं करता। इस बार अपुन की टीम हार गई तो अक्खा फॉल्ट अंपायर के सिर पे काइकू डाल रयेला है। वइसे भी तू इच बता, अक्खा टीम में खाली सचिन इच तो नहीं है। इत्ते सारे प्लेयर हैं। वो भी तो बैट घुमाना जानते थे पन सब के सब बुझेली तीली के माफिक लग रयेले थे। सबसे बड़ा विलेन अंपायर नहीं है, ये बात तेरे भेजे में कइसे घुसेंगी। वइसे भी इत्ता इमोशनल होके इंडियन टीम का मैच नहीं देखने का क्या? सर्किट बोला भाई, इमोशनल होके क्या, आज से तो अपुन कसम खाता है कि कभी क्रिकेट का मैच नहीं देखेगा। हॉकी और फुटबॉल की टीम इत्ता अच्छा खेल रयेली है, बस अपुन के वास्ते तो अब क्रिकेट खल्लास। अपुन बोला, सर्किट अइसी कसम मत खा, जिसकू तू अभीच तोड़ दे। तेरे जइसा क्रिकेट फैन कभी क्रिकेट मैच छोड़ इच नहीं सकता। वो बोला, नहीं भाई अपुन की ये कसम पक्की है। अपुन ने बोला कि ठीक है अगर ये बात है तो तू खोली से बाहर निकल। अपुन कू टीवी देखने का है। वो आज से ट्वेंटी-ट्वेंटी वर्ल्ड कप स्टार्ट हो रयेला है न। उसकू मिस नहीं करेंगा अपुन। वर्ल्ड कप की बात सुनते इच उसके फेस की ट्यूब लाइट जल गई और कसम को भसम करके टीवी रिमोट ढूंढने लगा।

50 का गेम 20 में खल्लास

ट्वेंटी 20 क्रिकेट अपुन कू जम गया, एकदम दही के माफिक। बोले तो अपुन कू तो अइसा लगता है कि जिसके भी भेजे में 20 ओवर के मैच का आइडिया आया होएंगा, वो दिल से इंडियन होगा। वर्ल्ड कप में इंडियन टीम का सड़ेला परफॉर्मेंस देख के इच उसने सोचा होएंगा कि पचास ओवर तक टीम की बेइज्जती खराब करने से तो अच्छा है कि बीस ओवर में इच गेम खल्लास करो। खुशी की बात ये है कि बीस ओवर के मैच कू सारे देश की टीम अइसे ले रयेली है जइसे पचास ओवर का गेम हो। कोई दस छक्के लगा रयेला है तो कोई बीस ओवर में 260 रन ठोक रयेला है। कोई सेंचुरी बना रयेला है तो कोई बीस बॉल में हाफ सेंचुरी ठोक रयेला है। अपुन की टीम भी वइसे कुछ कम नहीं है। पहले पच्चास ओवर में जइसा खराब खेलती थी, अभी भी वो स्टाइल मेनटेन कर रयेली है। वो तो गॉड ने बचा लिया स्कॉटलैंड से जो पहला मैच नहीं हुआ, वरना वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के माफिक हाल होता। आई शप्पथ, स्कॉटलैंड के नाम से भी अपुन कू डर लगता है। ये भी गॉड की कृपा है कि टीम का कोई कोच नहीं है, नहीं तो स्कॉटलैंड से मैच के बाद एक और मर्डर मिस्ट्री पैदा हो जाती, जिसकी गुत्थी कोई जेम्स बॉन्ड नहीं सुलझा पाता। वूल्मर मर्डर के बाद वाला सस्पेंस अभी तलक खल्लास नहीं हुआ है। पाकिस्तान के साथ मैच में भी गॉड ने अपुन की टीम का भोत हेल्प किया। वइसे टीम तो अपने पुराने स्टाइल से हारने के इरादे से इच मैदान में उतरी थी। प्लेयर लोग ने अपनी साइड से हारने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। साइकल स्टैंड के माफिक एक इच धक्के में सब के सब गिरने कू रेडी थे। स्कोर भी अब तलक का सबसे कम। फिर बॉलिंग की बारी आई तो पाक टीम कू जिताने के वास्ते पूरी हेल्प भी की। मालूम नहीं लास्ट बॉल में कइसे चूक हो गई और मैच टाई हो गया। वो तो भला हो उस आदमी का जिसने टी20 गेम के रूल बनाएले हैं। इंडिया की बेइज्जती खराब होने से बचाने के वास्ते क्रिकेट में फुटबॉल का रूल ठोक डाला। ताकि अपुन की नाक कू कोई भी सूर्पनखा समझ के काट न दे। बोल आउट में सहवाग से बॉलिंग कराके एक बार फिर टीम ने अपना रेकॉर्ड मेनटेन करने की कोशिश की। इस बार गॉड ने फिर हेल्प किया। अपुन ने बाद में न्यूजपेपर में पढ़ा कि पाकिस्तान टीम के कैप्टन कू इस नए रूल के बारे में कुछ मालूम इच नहीं था। अब तुम इच बोलो कि अगर उसकू ये रूल मालूम होता तो क्या इंडिया का कोई चांस था? अपुन कू तो नहीं लगता। इसलिए अपुन तो इस नए क्रिकेट कू पैदा करने वाले का थैंक्यू करता है। पचास का गेम बीस में खल्लास करके अपुन की लाज बचा ली।

फोकट का लोचा

फुकेले बम के माफिक आजकल अपुन का भेजा भी फुक रयेला है। अपुन कू टेंशन में देखके सर्किट का टेप, प्ले का बटन दबाए बिनाइच चालू हो गया। वो अपुन के भेजे से भी जास्ती फुकेला गाना गाने लगा - जब कोई बात बिगड़ जाए, जब कोई मुश्किल पड़ जाए, उसके मूड कू देख के अपुन कू डर लगा तो अपुन ने बीच में टोक के पूछ डाला - सर्किट, ये गाना पूरा गाएंगा क्या? वो बोला मुन्ना भाई, पहले गाना सुनने का। फिर अक्खा जोर लगा के चीखा - जब कोई बात बिगड़ जाए, जब कोई मुश्किल पड़ जाए, तो तो तो तो ये पांच वर्ड बोलने का - ऐ गणपत, चल दारू ला। बोलो भाई, कइसा लगा अपुन का आइडिया? ये सड़ेला जोक सुन के दिल में तो आया कि उसका सर्किट फ्यूज कर दूं पन उससे अपुन के भेजे की प्रॉब्लम दूर थोड़ी होने वाली थी। उसकू बताया कि अपुन फोकट के लोचे में फंस गयेला है। अक्खा टेंशन की जड़ है ये मोबाइल फोन। चिंकी बोलती है अपुन कू रोज एसएमएस डालो वो भी कम से कम दस। ये वोइच चिंकी है जिसकू पटाने के वास्ते पहले दस क्या, मालूम नहीं कित्ते एसएमएस डालता था अपुन। बोले तो उस टाइम पे तो एसएमएस का रेट भी 3 रुपल्ली था। 3 रुपल्ली बोले तो एक कटिंग चाय, एक उबला अंडा, तंबाकू का एक पैकेट और 3 सिगरेट! सोचो, अपुन अक्खा वर्ल्ड की ऐश कर सकता था पन वो ये सब किदर समझती थी। अपुन का ये बलिदान उस टाइम में फोकट में वेस्ट हो रयेला था। पटने के भोत टाइम बाद वो अपुन कू बोली कि कोई और काम धंधा नहीं है क्या तुमकू? इत्ते एसएमएस नक्को डालने का। तुम्हारे पास भेजने का फोकट टाइम है तो तुम अपुन का टाइम काइकू खोटी करता है? अब तुम इच बोलो, पहले अपुन कू लुक्खा, फालतू और वो दिल्ली की लैंग्वेज में बोलते हैं न कि वेल्ला समझ रयेली थी और अब टाइम ने अइसा पलटी खाया। अपुन के पास रियली में टाइम नहीं है तो बोलती है कि अपुन कंजूस है। एक एसएमएस तक नहीं भेज सकता? अब तूइच बोल सर्किट, जो काम अपुन पहले करता था, उसके लिए वो अपुन कू वेल्ला का टाइटल देती थी और अब जब वो काम अपुन नहीं करता है तो कंजूस बोलके अपुन के दिमाग का दही कर रयेली है। है न फोकट का लोचा। तेरेकू तो मालूम इच है अभी अपुन का धंधा कित्ता मंदा चल रयेला है। इत्ता खर्चा किदर से उठाएंगा अपुन? सर्किट कू फर्स्ट टाइम अपुन ने सीरियस देखा। यकीन नहीं हुआ कि सर्किट सीरियस भी हो सकता है। एकदम ए. के. हंगल के माफिक थोबड़ा बनाके बोला - भाई अपुन के मोबाइल में आज इच एक एसएमएस की नई स्कीम आएली है। तुम वो इच स्कीम ले लो, टेंशन खल्लास! अपुन डर गया, उसके भेजे में एक स्कीम पक रयेली है। माफ कर, अपुन कू हजम नहीं होती तेरी स्कीम। एक गांधी बापू, बोले तो 5 सौ रुपल्ली का रिचार्ज कराने से दस साल की वैलिडिटी 5 हजार का टॉक टाइम और 50 हजार एसएमएस फ्री!!!! अपुन की आंखें मनोरमा के माफिक बाहर आ गई। अपुन ने सर्किट कू बड़े स्टाइल से बोला - ठीक है, आज इच चालू कर दे अपुन के फोन पे ये स्कीम। पन लगता है कि वो अपुन से किसी जनम का बदला ले रयेला था। बोला - भाई, ये स्कीम तो तुमकू खुद इच लगानी पड़ेगी। इसका वास्ते वेबसाइट खोलो - आगरा के पागलखाने से आयेला है क्या डॉट कॉम !!!!

मंगलवार, 9 अक्टूबर 2007

फोकट का अडवाइस

अपुन और अपुन की चारपाई...फीवर चढ़ता है तो अक्सर एक इच बात सोचते हैं। लाइफ में सोशल सर्कल जास्ती बड़ा नहीं होना चाहिए। बोले तो इदर तबियत डाउन, उधर अक्खा गैंग एक्टिव। सब के सब अपने भेजे की धूल कू झाड़-पोछ के सामने आ जाते हैं एक अडवाइस लेके। ये खाने का, वो नहीं खाने का...चलो इदर तलक बात हो तो चलता है। पन बस्ती के एक येड़े राजू कबाड़ी के बारे में अपुन तुमकू क्या बताए। इत्ता भंगार तो उसकी दुकान में भी नहीं है, जित्ता उसके भेजे में सड़ रयेला है। बोले तो, अडवाइस देने के लिए मुंह खोलता है तो अइसी अइसी मनहूस बातें मुंह से उगलता है जइसे बाजू की बस्ती का कूड़ेदान अक्खा टाइम बास उगलता है। ये कर ले, नहीं तो खाट पे लंबा पड़ जाएंगा, वो कर ले नहीं तो हाथ काटना पड़ेंगा... बोले तो उसकू इत्ती बार बोला, मामू गॉड ने तेरे कू अच्छी शकल नहीं दी तो कम से कम इस सड़ेले थोबड़े से बातें तो शुभ शुभ करना मांगता है। पन वो तो अइसा कसम खाके पैदा हुआ था कि जब भी मुंह खोलेगा तो मनहूस बोल बचन इच निकालेंगा। एक और शाणा है बस्ती में। टीवी पे ऐड देखके एक फोन लियेला है फोकट का। दिन और रात उसके वास्ते बरोबर है। येड़ा कभी भी अपुन का नंबर घुमा देता है। अपुन कू तो लगता है कि कंपनी ने उसी के वास्ते फोकट का फोन लॉन्च कियेला है। अपुन पूछता है कि तेरे फोकट के फोन के चक्कर में अपुन अपना कीमती भेजा काइकू खपाए। खाली-पीली बीमार आदमी का टाइम खोटी करने वाले से अपुन कू भोत नफरत है। अडवाइस देने से मन भर जाता है तो फिर फोकट के सवाल पूछ-पूछ के भेजा फ्राई करता है। शाणे की हिम्मत तो देखो। अपुन बीमार है, अपुन खोली की खाट पे खटमल के माफिक चिपकेला बैठा है और अपुन से इच बोलता है कि मुन्ना भाई, अपुन तुम से भोत नाराज है। क्या बात है, आजकल फोन नहीं करते हो? इत्ते दिन हो गयेले हैं, एक भी फोन नहीं किया। अरे, अपुन पूछता है कि बीमार अपुन है पन भेजा तेरा खाली हो रयेला है। इत्ता भी नहीं समझता कि बीमार आदमी आराम करेगा या फिर पब्लिक कू फोन घुमाता रहेगा। इस बीमार पे कुछ तो रहम खा। पन ये अडवाइस देने वाले और फोकट के सवाल पूछने वाले रहम किदर से खाएंगे। इनका पेट तो अपुन जइसे लोग का भेजा खाके भरता है न।

मंगलवार, 2 अक्टूबर 2007

नो भाईगीरी ओनली गांधीगीरी।

अपुन खाट पे खटमल के माफिक चिपक के लेटेला था। तभीच खोली के दरवाजे कू किसी ने डंडे से पीटा, एकदम अपुन के मकान मालिक के इश्टाइल में। पन खोली का भाड़ा तो अपुन ने कल इच दे डाला है। फिर सुबह सुबह कौन? अरे बापू! गांधी बापू पांच सौ के नोट में से निकल के अपुन की खोली में किदर से आया? बापू बोले - मुन्ना ये सवाल तो मुझे करना चाहिए। तू मुंबई छोड़ के दिल्ली क्यों आया। तुझसे तो मेरी मुलाकात मुंबई में हुई थी ना? अपुन बोला - बापू तुम बात तो एकदम ठीक कर रयेला है पन दिल्ली तो दिल्ली है। मालूम है, अपुन ने पेपर में पढ़ेला था कि दिल्ली अक्खा देश की नंबर वन सिटी है। इसका वास्ते अपुन और सर्किट मुंबई छोड़के दिल्ली में इच जम गयेले हैं। बोले तो अब ये दिल्ली तुम्हारे टाइम की दिल्ली नहीं है रे। उस टाइम तो क्या, ये दिल्ली में तो रोज रोज चेंज आ रयेले हैं। तुम इच बोलो, मुंबई में तो मालूम नहीं कित्ते सालों से बड़ी बड़ी बिल्डिंग हैं, उसके आगे भोत कम स्कोप है। पन दिल्ली में रोज नई बिल्डिंग, रोज नया फ्लाईओवर और रोज नया मॉल खुल रयेला है। बोले तो मुंबई से साइज में बड़ी है न। और एक टॉप सीक्रेट बात बताता है। अपुन जइसे लुक्खे लोग के वास्ते इदर स्कोप जास्ती है। उदर भाईगीरी करने वाले भोत शाणे हैं पन इदर अपुन का राज चलता है। ओ सॉरी बापू, भाईगीरी से अपुन कू तुम्हारी सिखाई गांधीगीरी याद आ गयेली है। अरे हां, तुमकू मालूम है बापू, गांधीगीरी के वास्ते तो ये जगह एकदम परफेक्ट है। बापू ने अपुन से पूछा - क्यों, यहां क्या वो लोग ज्यादा रहते है, वो, वो तुम्हारी भाषा में मामू लोग, जिन्हें ठीक करने के लिए गांधीगीरी की जरूरत पड़ती है। अपुन ने बापू कू बताया - नहीं रे बापू, अइसा नहीं है। मामू टाइप का आदमी तो अपुन कू अक्खा देश में कहीं भी मिल जाएगा। अपुन बात कर रयेला है गांधीगीरी के कोर्स की। इदर डीयू में गांधीगीरी पढ़ाने के वास्ते अक्खा कोर्स बनाएला है। भोत सारे स्टूडेंट लोग ने एडमिशन लियेला है उसमें। बोले तो गांधीगीरी कू भेजे में अच्छी तरह घुसाने के वास्ते स्टूडेंट लोग तुम्हारे गांव भी जाते हैं। अपुन की बात सुनके बापू भोत खुश हुआ फिर अपुन से बोला - लेकिन तुमने तो यहां आकर फिर से भाईगीरी शुरू कर दी है। अपुन ने समझाया - बापू, वो जिस दिन से तुम अपुन कू छोड़के गया है न, अपुन भोत टेंशन में था। अक्खा वर्ल्ड की पब्लिक अपुन कू पागल बोलने लगी थी। तुम तो अपुन से अइसा रूठा जइसे सावन रूठ के चला जाता है। और तब से अपुन की हालत किसान के माफिक हो गई थी, जिसके खेत सूख रयेले थे। और तो और अपुन के पर्स में एक गांधी का नोट तलक नहीं था। धंधा चौपट हो गया तो अपुन तुमकू ढूंढने के वास्ते दिल्ली आ गया। भोत दिन तक तुम्हारा वेट किया। तुम नहीं आया तो धंधा स्टार्ट किया। नोट आने लगे और नोट के अंदर तुम्हारा दर्शन भी हो गया। सब कुछ तुमकू पाने के वास्ते इच तो किया अपुन। अपुन का बहाना बापू कू पसंद नहीं आया और वो गायब हो गया। अपुन जोर से चिल्लाया - बापू, बापू सॉरी बोलताय अपुन। आगे से भाईगीरी नहीं, सिर्फ गांधीगीरी, आई शप्पथ। तभीच किसी ने जोर से खोली का दरवाजा ठोका और अंदर आ गया। अपुन ने आंख खोली तो सच्ची मुच्ची का लैंडलॉर्ड आयेला था, खोली का भाड़ा मांगने के वास्ते। अपुन ने उसकू बोला कि कल इच तो सर्किट के हाथ से चार करारे गांधी के नोट भेजेले थे। वो बोला - तू और तेरा सर्किट, कहीं दारूबाजी में उड़ा दिए होंगे। मुझे तो अभी दे नोट चार करारे गांधी बापू वाले। अपुन के दिल में तो आया कि उसकू एक कान के नीचे पिन्हा दूं पन फिर सपने में बापू से किया प्रॉमिस याद आ गया। नो भाईगीरी ओनली गांधीगीरी।