सोमवार, 26 नवंबर 2007

ये इंडिया का क्रिकेट है...

अपुन संडे का वेट पूरे एक वीक से कर रयेला था। नहीं, अपुन के धंधे में कोई संडे फन डे नहीं होता। काम पे जाने के वास्ते संडे कू अक्खा दिल्ली की रोड मस्के के माफिक चिकनी मिलती है ना, इसके वास्ते अक्खा वीक अपुन संडे का वेट करता है। पन ये संडे तो अपुन की वाट लग गई। बोले तो धंधे को बाजू में रखके कोटला में मैच देखने का प्लान बना डाला था। बस यइच गलती से मिस्टेक हो गई। सर्किट जब भी अपने भेजे कू काम पे लगाता है, अपुन दोनों की वाट लगती है। सचिन का भोत बड़ा फैन है ना वो।

खोली से जल्दी निकलने के चक्कर में अपुन दोनों ने पेट पूजा भी नहीं की। रोड तो खाली मिली पन स्टेडियम के पास जाके भेजे में घुसा कि ये इंडिया का क्रिकेट है भीड़ू। बोले तो जित्ता महंगा टिकट नहीं था, उससे जास्ती रोकड़ा अपुन कू खटारा कार की पार्किंग में ढ़ीला करना पड़ा। सर्किट के भेजे का बल्ब जला तो उसने बोला कि स्टेडियम के बाजू में बड़े-बड़े ऑफिस की पार्किंग में गाड़ी पार्क करते हैं। उदर दस रुपल्ली में अक्खा दिन का काम हो जाएंगा। पन उदर जाके मालूम चला कि ये इंडिया का क्रिकेट है भीड़ू। पार्किंग वाला बोला मैच देखने के वास्ते आयेला है तो निकाल 200 रुपल्ली। ये सुनके दिमाग का दही हो गया। अपुन ने उसकू बोला - ऐ मामू, तेरेकू क्या लगता है? अपुन आगरे से आयेले हैं क्या?

वो बोला - देखो अभी दोपहर हो गयेली है, मैच खल्लास होने में पूरे दो घंटे हैं। गाड़ी पार्क करनी है तो बोल नहीं तो पतली गली से कल्टी हो जा। दूसरी गाड़ी आ गई ना, तो ये 200 वाली पार्किंग थोड़ी देर में तेरेकू 300 की पड़ेगी।

सर्किट गुस्से में बोला - ओ शाणे, दस रुपये की पार्किंग के बदले 300 काइकू देगा? सिरदर्द की दवाई का साइड इफेक्ट हो गयेला है क्या?

पार्किंग वाला बोला - वो टीवी पे ऐड नहीं देखा क्या, ये इंडिया का क्रिकेट है भीड़ू। देखना है तो पइसा ढ़ीला करो, वरना...। वइसे भी, तुम कइसा क्रिकेट फैन है? सचिन कू बैटिंग करते देखने के वास्ते 200 रुपया ढ़ीला नहीं कर सकता? इत्ता बड़ा स्टार क्रिकेटर तुम्हारे सामने जलवा दिखाएगा और तुम 200 रुपये के वास्ते रो रयेला है? सचिन पे तो अक्खा पर्स कुरबान करती है पब्लिक। वइसे भी अपुन पब्लिक का थोबड़ा देखके रेट बोल रयेला है। तुम्हारे जइसे फुकेले बम के माफिक लोगों के वास्ते यइच रेट रखेला है। साउथ दिल्ली का कोई चिकना छोकरा होता ना, तो 500 से कम नहीं लेता। अब टाइम खोटी नहीं करने का, पइसा देना है तो बात करो।

26-11-2007

बुधवार, 21 नवंबर 2007

है तो पी और बी हैपी

दोपहर हो गयेली थी और सर्किट है कि उठ इच नहीं रयेला था। मालूम नहीं रात कू कितनी बाटली गटक के सोयेला था। रोज तो ब्रेकफास्ट करने के चक्कर में जल्द उठ जाता था। आज मालूम नहीं क्या हुआ? पेट के चूहों कू छुट्टी मनाने के वास्ते कुल्लू मनाली भेज दियेला है क्या? या फिर रात कू कल्लू के ढाबे के डिनर में कुछ घपला था? एक दुलत्ती मार के अपुन ने उसकू उठाया तो आंख मसलते हुए बोला - क्या है मुन्नाभाई? काइकू सुबह-सुबह दिमाग का दही कर रयेले हो? सुबह-सुबह? लंच टाइम होने कू आया और तू इसे सुबह समझ रयेला है? अपुन ने एक और दुलत्ती दी तो फोल्डिंग खाट के साथ सर्किट भी पूरा फोल्ड हो गया। उठके बोला - भाई, अपुन जानबूझकर देर तक सो रयेला है। अपुन तो कहता है कि तुम भी थोड़ी देर आराम कर लो। टाइम कट जाएंगा। अपुन कू उसकी बात समझ में नहीं आई। टाइम काटने की जरूरत काइकू पड़ गई तेरेकू?

अपुन कू याद दिलाया - भाई, तुम्हारी मेमोरी भी लगता है कि दीवाली की छुट्टी मनाके अभी वापस नहीं लौटी है। तुम्हे तो अपुन कू थैंक्यू बोलना चाहिए। आज दगड़ू ढक्कन की हैपी मैरिज एनिवर्सरी है। उसने कल इच तो बोला था अपुन कू। अब मैरिज एनिवर्सरी की पार्टी तो अपुन उससे मांगेगा इच ना! इसका वास्ते अपुन जानबूझके सुबह नहीं उठा। देखो ना, तुम अपुन के ब्रेकफास्ट कू लेके टेंशन में रहता था ना? आज अपुन ने देर तलक सोके ब्रेकफास्ट और लंच दोनों का खर्चा बचा लिया है। शाम कू दगड़ू ढक्कन से पार्टी लेने का है न। सर्किट का हिसाब किताब अपुन भेजे में घुसाइच रयेला था कि उदर खोली का फाटक खोलके दगड़ू ढक्कन ने अइसे एंट्री मारी जइसे समंदर की लहरों के साथ मछली किनारे पे आ जाती है। सर्किट खाट से स्प्रिंग के माफिक उछलके बोला - अरे, दगड़ू भाई, तुम्हारी उमर भोत लंबी है। अभी अपुन तुमकू इच याद कर रयेले थे। हैपी एनिवर्सरी। सर्किट के साथ-साथ अपुन ने भी उसकू हैपी एनिवर्सरी विश किया तो वो उसका थोबड़ा अइसे लटक गया, जइसे किताबों के बोझ से स्कूल के बच्चों का बैग लटक जाता है। बोला - भाई, कभी किसी क्रिस्चन कू गुड फ्राइडे के दिन हैपी गुड फ्राइडे थोड़ी बोलते हैं और कभी किसी मुस्लिम कू मुहर्रम में हैपी मुहर्रम नहीं बोला जाता। एक तो वइसेइच अपुन की लाइफ की वाट लगेली है ऊपर से तुम हैपी एनिवर्सरी बोल रयेला है। अइसा बोलके दगड़ू तो खोली से कल्टी हो गया, सर्किट बेचारा अपुन का थोबड़ा देखता रह गया। अपुन ने उससे बोला कि दगड़ू कि हैपी एनिवर्सरी गई तबेले में। दिन का धंधा खोटी हो गयेला है। डिनर का भी जुगाड़ नहीं है। बी हैपी और दारू बची है तो पी और फिर से सो जा।

मंगलवार, 6 नवंबर 2007

शोएब बना मामू

उस दिन अपुन सुबह-सुबह इच उठ गया। जिस दिन सुबह जल्दी उठता है न , वो दिन भोत खराब बीतता है अपुन का। नींद भी खुली तो सर्किट के शोर से। बोले तो मोबाइल में नया प्लान लगाएला है न , फ्री टॉकटाइम वाला। बस अक्खा दिन किसी न किसी कू अडवाइस देता रहता है। आजकल अपुन की सुबह रोज उसके फोन के शोर से इच होती है।

उस दिन अपुन उठ तो गया जल्दी पन ब्रेकफास्ट करने के बाद अपुन का आंख फिर लग गया। इस बार फिर सर्किट के शोर से इच आंख खुली। वो अपुन कू उठा रयेला था। सुबह हो गई मामू , जल्दी रेडी हो जाओ , फिरोजशाह कोटला स्टेडियम जाने का है। बोले तो दगड़ू ढक्कन तो उदर सुबह से इच सीट घेर के बैठेला है। पाकिस्तान की टीम आएली है दिल्ली की टीम के साथ प्रैक्टिस करने के वास्ते। जास्ती भीड़ भी नहीं है स्टेडियम में। वइसे , स्टेडियम में मैच देखने का सपना तो अपुन बचपन से इच पाल के बैठेला था , पन आज तलक कभी चांस इच नहीं मिला। पन नींद छोड़के भीड़भाड़ में मैच देखने का आइडिया अपुन कू जमा नहीं। लेकिन सर्किट ने जब ये बताया कि एंट्री फोकट की है तो अपुन ने सोचा कि सर्किट पे अहसान कर इच डालते हैं। ढिनचैक रेडी होके अपुन दोनों बिंदास पौंच गये स्टेडियम। हाइला , ये क्या हो रयेला है ? दिल्ली की टीम के साथ मैच देखने के वास्ते भी इत्ती पब्लिक! स्टेडियम का शोर तो कानों में पड़ इच रयेला था , पन स्टेडियम के बाहर कम से कम बोले तो एक लाख पब्लिक तो खड़ी इच थी। सबकू अंदर जाने कू था। अंदर घुसने का कोई चांस नजर नहीं आ रयेला था। किसी तरह पुलिस कू टोपी पिन्हा के अपुन सर्किट के साथ अंदर घुस इच गया।

अंदर घुसते इच एक बार फिर अपुन दोनों के मुंह से कोरस में निकला - हाइला! ये क्या हो रयेला है ? कौन प्लेयर खेल रयेला है , कुछ मालूम नहीं चल रयेला था। टीवी पे बॉक्सर जइसे दिखने वाले पाकिस्तानी प्लेयर उदर अपुन के डेढ़ फुटिए के माफिक दिख रयेले थे। दो मिनट के अंदर भेजे में घुस गया कि खोली में टीवी के आगे बैठकर मैच देखने का जो मजा है , वो अक्खा वर्ल्ड में किदर भी नहीं है। अपुन दोनों मैच देखने के बजाय ट्रैजिडी किंग दिलीप कुमार के माफिक थोबड़ा बनाके बैठ गए। आई शप्पथ , इत्ता रिक्स उठाके अपुन दोनों इदर पौंचे और इदर इत्ती बड़ी टैजिडी।

तभीच अपुन कू पीछू से आवाज आई। हटो , रास्ता छोड़ो। हाइला , ये क्या! शोएब अख्तर जिम से बॉडी बनाके आ रयेला है। अपुन कू यकीन नहीं हुआ कि आंखों के आगे अपुन का फेवरिट स्टार अइसे खड़ा हो जाएंगा। तभीच अपुन के भेजे का बलब जला। सर्किट का फोन छीन के झट से शोएब का फोटू खींच लिया। इत्ते में शोएब आगे बढ़ गया और एक लेडी कॉन्स्टेबल की टोपी पहन के फोटू खिंचाने लगा। आई शप्पथ भोत जम रयेला था पुलिस की टोपी में। शोएब कू देखने के बाद अपुन दोनों स्टेडियम से बाहर गोविंदा छाप स्माइल लेके निकले।

पाकिस्तान का हैंगओवर अपुन के भेजे में अगले दिन तक था कि अचानक टीवी पे देखा पाकिस्तान में इमरजेंसी लग गयेली है। ये न्यूज सुनके अपुन के भेजे में सबसे पहले पाक क्रिकेट टीम का खयाल आया। सीरीज खेलकू क्या वो वापस जाएंगे या फिर इदर इच रह जाएंगे ? सर्किट बोला - भाई , काश अइसा हो जाता! अपुन की टीम और भी स्ट्रांग हो जाती। आइसीएल , आईपीएल... किसी न किसी में सबकू नौकरी मिल जाती। और जहां तक शोएब का सवाल है , उसकू दिल्ली पुलिस में भर्ती कर लेते। जवान की टोपी में भोत मस्त लगता है न वो।

रविवार, 4 नवंबर 2007

अक्खा दिन रोई दिल्ली

सर्किट और अपुन 2 दिन से खोली पे फुकेले बम के माफिक पड़ेले हैं। किदर भी हिलने-डुलने की हिम्मत नहीं हो रयेली है। बस्ती के किसी नए शाणे के डर के मारे नहीं, संडे कू जो अपुन दोनों की वाट लगी उसने अपुन दोनों की हवा निकाल दी। बोले तो संडे कू सुबह-सुबह उठके दोनों ने शप्पथ खाई थी कि मैराथन में भागेंगे। पन आई शप्पथ, ये शप्पथ तो भोत महंगी पड़ गई। सुबह से जो भागना शुरू किया तो रात तक भाग इच रयेले थे अपुन दोनों। बोले तो सुबह मैराथन ने भगाया। सर्किट तो पूरे ओवर कॉन्फिडेंस में खोली से निकला था। बोला, मुन्नाभाई अपुन बचपन में बस्ती की हर रेस में फर्स्ट आता था, ये तो वैसे भी हाफ मैराथन है। इसमें तो अपुन का गोल्ड मेडल पक्का इच समझो। सर्किट का ये जोश अपुन ने पहले कभी नहीं देखा था। इत्ते में बाजू की खोली से कल्लू कचरा आया और उसने सीक्रेट खोला तो भेजे में घुसा। बोले तो हाफ मैराथन में सर्किट की फेवरिट हीरोइन प्रियंका चोपड़ा आ रयेली है। पब्लिक कू चीयर अप करने के वास्ते। इस न्यूज कू सुनके सर्किट कई दिनों से चीयर अप हो रयेला था, ये बात अपुन के भेजे में काइकू नहीं घुसी। ओह अब सारी पिच्चर सर्किट के भेजे के माफिक अपुन के आंखों के आगे साफ-साफ तैर रयेली है। हाफ मैराथन में दौड़ने के वास्ते ये एक रात पहले से इच हाफ पैंट पहन के काइकू सो गया था। सुबह उठके लेट नहीं होना मांगता है न भाई। यइच बोलके अपुन कू टोपी पिन्हाया था सर्किट ने रात कू। अपुन मासूम उसकी बात में आ गया और संडे की छुट्टी का बाजा बजाने के वास्ते रेडी हो गया। वइसे सर्किट तो सोच रयेला था कि सुबह प्रियंका चोपड़ा के दर्शन करेगा और शाम कू उसके सपने लेगा पन सुबह हाफ मैराथन में हांफ हांफ के हाफ रूट भी कवर नहीं कर पाया सर्किट। अपने बारे में अपुन कू कोई गलतफैमिली नहीं था। अपुन तो कभी फर्स्ट आया नहीं था मोहल्ले की रेस में। हाफ मैराथन कू हाफ में इच छोड़के दोनों रोड के बाजू में बुझेली तीली के माफिक गिर गए। आंख खुली तो सीन देखके हैरान। दोपहर हो गयेली है और हाफ मैराथन अभी तलक चालू। सर्किट ने आंख से कीचड़ साफ किया और बोला-भाई ये तो फुल मैराथन दिख रयेली है। पब्लिक के हाथ में झंडे किदर से आ गये। अपुन ने भी देखा, हाफ मैराथन में ट्रैक सूट वाली पब्लिक बाद में धोती और साड़ी में कइसे चेंज हो गयेली है। तभीच पीछू से ट्रैफिक मामू का डंडा पड़ा। इदर से कल्टी हो जाओ। किसान लोग की रैली जा रही है। अपुन दोनों ने बाइक उठाई बाहर निकलने के वास्ते। पन इदर से बाहर निकलेंगे कइसे। ये रास्ता बंद, इदर से नहीं जाने का, उदर से नहीं जाने का...। अरे तो बाहर कइसे निकलें। मामू ने ये तो बोल दिया कि बाहर निकलो पन कल्टी मारने का रास्ता किदर से है, ये नहीं बताया। अपुन दोनों ने एक इच रास्ते के इत्ते चक्कर काटे की दोपहर से रात हो गई। इदर अपुन दोनों की एनर्जी खल्लास, उदर बाइक का पेट्रोल खल्लास। पेट्रोल भरा के खोली कू निकल रयेले थे पन गॉड कू मंजूर नहीं था। खोली के बाहर मंदिर के आगे करवा चौथ के वास्ते मेहंदी लगाने वाली लेडीज लोग ने ट्रैफिक जाम लगा के रखा था। इत्ती भीड़ देखके अपुन दोनों उदरइच फुकेले बम के माफिक ढेर हो गए।


28 october 2007, Half marathon and Janadesh rallies caused heavy trffic jam all around the delhi...