बुधवार, 21 नवंबर 2007

है तो पी और बी हैपी

दोपहर हो गयेली थी और सर्किट है कि उठ इच नहीं रयेला था। मालूम नहीं रात कू कितनी बाटली गटक के सोयेला था। रोज तो ब्रेकफास्ट करने के चक्कर में जल्द उठ जाता था। आज मालूम नहीं क्या हुआ? पेट के चूहों कू छुट्टी मनाने के वास्ते कुल्लू मनाली भेज दियेला है क्या? या फिर रात कू कल्लू के ढाबे के डिनर में कुछ घपला था? एक दुलत्ती मार के अपुन ने उसकू उठाया तो आंख मसलते हुए बोला - क्या है मुन्नाभाई? काइकू सुबह-सुबह दिमाग का दही कर रयेले हो? सुबह-सुबह? लंच टाइम होने कू आया और तू इसे सुबह समझ रयेला है? अपुन ने एक और दुलत्ती दी तो फोल्डिंग खाट के साथ सर्किट भी पूरा फोल्ड हो गया। उठके बोला - भाई, अपुन जानबूझकर देर तक सो रयेला है। अपुन तो कहता है कि तुम भी थोड़ी देर आराम कर लो। टाइम कट जाएंगा। अपुन कू उसकी बात समझ में नहीं आई। टाइम काटने की जरूरत काइकू पड़ गई तेरेकू?

अपुन कू याद दिलाया - भाई, तुम्हारी मेमोरी भी लगता है कि दीवाली की छुट्टी मनाके अभी वापस नहीं लौटी है। तुम्हे तो अपुन कू थैंक्यू बोलना चाहिए। आज दगड़ू ढक्कन की हैपी मैरिज एनिवर्सरी है। उसने कल इच तो बोला था अपुन कू। अब मैरिज एनिवर्सरी की पार्टी तो अपुन उससे मांगेगा इच ना! इसका वास्ते अपुन जानबूझके सुबह नहीं उठा। देखो ना, तुम अपुन के ब्रेकफास्ट कू लेके टेंशन में रहता था ना? आज अपुन ने देर तलक सोके ब्रेकफास्ट और लंच दोनों का खर्चा बचा लिया है। शाम कू दगड़ू ढक्कन से पार्टी लेने का है न। सर्किट का हिसाब किताब अपुन भेजे में घुसाइच रयेला था कि उदर खोली का फाटक खोलके दगड़ू ढक्कन ने अइसे एंट्री मारी जइसे समंदर की लहरों के साथ मछली किनारे पे आ जाती है। सर्किट खाट से स्प्रिंग के माफिक उछलके बोला - अरे, दगड़ू भाई, तुम्हारी उमर भोत लंबी है। अभी अपुन तुमकू इच याद कर रयेले थे। हैपी एनिवर्सरी। सर्किट के साथ-साथ अपुन ने भी उसकू हैपी एनिवर्सरी विश किया तो वो उसका थोबड़ा अइसे लटक गया, जइसे किताबों के बोझ से स्कूल के बच्चों का बैग लटक जाता है। बोला - भाई, कभी किसी क्रिस्चन कू गुड फ्राइडे के दिन हैपी गुड फ्राइडे थोड़ी बोलते हैं और कभी किसी मुस्लिम कू मुहर्रम में हैपी मुहर्रम नहीं बोला जाता। एक तो वइसेइच अपुन की लाइफ की वाट लगेली है ऊपर से तुम हैपी एनिवर्सरी बोल रयेला है। अइसा बोलके दगड़ू तो खोली से कल्टी हो गया, सर्किट बेचारा अपुन का थोबड़ा देखता रह गया। अपुन ने उससे बोला कि दगड़ू कि हैपी एनिवर्सरी गई तबेले में। दिन का धंधा खोटी हो गयेला है। डिनर का भी जुगाड़ नहीं है। बी हैपी और दारू बची है तो पी और फिर से सो जा।

1 टिप्पणी:

kamlapandey ने कहा…

बहुत बढ़िया ... मजा आ गया