गुरुवार, 10 अप्रैल 2008
फर्स्ट टाइम अपुन बाप बनेला है
वइसे शादी तो उसने पांच साल पहले इच बना ली थी , पन इस जालिम वर्ल्ड में जूनियर सर्किट की एंट्री के बारे में सोचके भोत डरता था। कइसे पालेंगा , क्या खिलाएंगा और सबसे बड़ी टेंशन ये कि बड़ा होके उसकू क्या बनाएंगा। ये सब सोच सोच के वो अपना सर्किट तो फ्यूज करता इच था , अपुन के दिमाग का भी दही कर देता था। अपुन तो ये सोच के डरता था कि अभी बाप नहीं बनेला है तो इत्ता टेंशन है ,, जब बाप बन जाएंगा , तो क्या करेंगा।
अचानक सर्किट की लाइफ में टर्निंग पॉइंट आया। उसके साथ के सब टपोरी लोग एक के बाद एक बाप बनने लगे। आज किसी की खोली से लड्डू आ रयेला है , तो कल किसी के घर में हिजड़े बच्चा होने की खुशी में नागिन डांस कर रयेले हैं। ये सब देख देख के सर्किट के अंदर का बाप जागा और उसने फटाफट गुड न्यूज सुना डाला। बोले तो उसकी एक्साइटमेंट का एक टाइम अइसा भी था कि वो मिसेज सर्किट से तीसरे-चौथे महीने से इच पूछने लगा कि बच्चा कब होएंगा। रोज डेली ये सवाल सुनके बेचारी के सिर में हेडेक हो जाता था।
जब बच्चा हो गया तो चार पांच दिन के बाद इच सर्किट के भेजे की साइकल का टायर पंचर हो गया। मिसेज सर्किट के आगे एक और सवाल-ये बड़ा कब होएंगा। वइसे गॉड का करम है कि अभी तलक सर्किट भोत हैपी है। अक्खा बस्ती में मिठाई बंट रयेली है। और जब से हिजड़े ने उसके बच्चे कू रितिक रोशन जइसा बोला है न , तब से सर्किट क्रे जी हो गयेला है। बच्चे के करियर की टेंशन जो दूर हो गयेली है।
अपुन का अक्खा गैंग भोत खुश है इस नए मेंबर के आने से। कल शाम कू धंधे के बाद अपुन लोग खोली पे बैठ के जशन मना रयेले थे कि अचानक पक्या ने सबकू सेंटी कर दिया। बोला , मुन्ना भाई अभी तलक सर्किट कू बच्चा पैदा करना मुश्किल लग रयेला था पन मुश्किल काम तो अब शुरू हुआ है। अपुन कू भाभी के बारे में सोच सोच के टेंशन हो रयेली है। उसके इत्ते सारे सवाल के जवाब भाभी कू ढूंढने हैं। ये बच्चा बोलना कब सीखेगा , चलना कब सीखेंगा , दांत कब आएंगे , स्कूल में एडमिशन का टेंशन , उसके बाद एग्जाम में अच्छे नंबर का लोचा। फिर कॉलेज में एडमिशन का चक्कर , फिर नौकरी कब लगेगी। अच्छी नौकरी मिलेगी कि नहीं , सैलरी भी अच्छी होनी चाहिए। तभीच अज्जू कड़वा बोला - सर्किट की ये टेंशन सिर्फ उसके बेटे की शादी तक इच होगी। अच्छी लड़की कइसे मिलेंगी ? बेटे के बारे में मिसेज सर्किट से उसका ये लास्ट सवाल होगा। एक बार मैरिज हो जाएगी तो बहू के चक्कर में आके मां-बाप कू अइसा ठेंगा दिखाएंगा कि अक्खा टेंशन खल्लास।
कड़वे के मुंह से करेले से भी कड़वी बात सुनके सर्किट ने उसकू दो हाथ पिन्हाए और बोला कि फर्स्ट टाइम अपुन बाप बनेला है , इसका वास्ते टेंशन होती है। फ्यूचर में क्या लिखेला है तू अभी से इच काइकू भविष्यवाणी कर रयेला है ? सर्किट ने उसकू खुन्नस तो दिखा दी पन बाद में अपुन ने भी फील किया कि कड़वे के थोबड़े से कड़वा सच सुनके सर्किट संभल गया और उसके बाद से भाभी से कोई भी सवाल नहीं किया।
नमिता जोशी
शुक्रवार, 4 अप्रैल 2008
सबसे चकाचक चश्मा
वो पूछा- आपकी तारीफ! अपुन बोला, ये तारीफ का टाइम नहीं है। जास्ती भंकस नहीं करने का क्या! चुपचाप हफ्ता ढीला कर, वरना तेरे जबड़े से दो दांत ढीले कर देगा।
हाइला! अपुन की हूल सुनके भी वो कूल है। बोला-भाई, सुबह से एक भी कस्टमर नहीं आया है। चाहो तो अपुन की दुकान का ये सबसे चकाचक चश्मा तुम रख लो। अगले हफ्ते आकर डबल हफ्ता ले जाना और ये चश्मा इदर फेंक जाना। अपुन ने वो चश्मा ले इच लिया और उदर इच उसका उद्घाटन कर दिया।
शाम कू खोली पे लौटा, तो जैसे बैकग्राउंड से आवाज आई। वहां हकला हज्जाम अपने जूते जइसे मुंह कू फाड़ के चवन्नी छाप स्माइल दे रयेला था। अभी तो इसने अपने मोजे जइसी जीभ बाहर भी नहीं निकाली, तो फिर ये उसकी आवाज निकाल के अपुन कू कौन गाली दे रयेला है! फिर वोइच आवाज आई- आ गया साला मुन्ना। काला चश्मा लगाके खुद को हीरो समझ रयेला है, पन दिखता पूरा बंदर है। आज जब तलक ये खोली का भाड़ा नहीं चुका देता, अपुन इसकी खाट से खटमल के माफिक चिपक कर बइठा रहेगा। हाइला! ये कौन बोला? ये सवाल सुनके हकला एकदम डर गया। बोला - अरे आओ आओ मुन्ना भाई। तुम्हारी उमर भोत लंबी है। अभी अपुन तुमकू इच याद कर रयेला था। याद कर रयेला था! दिल में अपुन के वास्ते इत्ता जहर भरके बैठेला है और सामने से अपुन कू मस्का लगा रयेला है। पन उसके मन की बात अपुन कू कइसे सुनाई दी।
अइसा तो खाली एकता कपूर के टीवी सीरियल में होता है। सारे कैरेक्टर आपस में मुंह से बात कम करते हैं और मन में जास्ती। अइसे इच पूरा आंधा घंटा निकल जाता है और सीरियल खल्लास। पन अपुन की लाइफ का सीरियल तो अब चालू हुआ था।
अचानक अज्जू कड़वे ने भी खोली में अवतार लिया। अपुन कुछ पूछता, उससे पहले इच उसकी साउंड भेजे में घुसी। बोल रयेला था - साले मुन्ना, कब तलक अपुन लोग की छाती में मूंग दलेगा। इत्ती गर्मी में वसूली करने के वास्ते अपुन कू भेजता है और शाम कू अक्खे गैंग के खून पसीने की कमाई अपनी पॉकेट में। आज तू देख, अक्खे गैंग के साथ मिलके तेरे कू ठिकाने लगाने का सॉलिड प्लान बनाता है। बस सर्किट आ जाए। सर्किट किदर से आ जाए? अपुन ने अज्जू कड़वे से पूछा तो वो डर के बोला- अरे भाई, अपुन कू क्या मालूम सर्किट के बारे में।
अपुन ने फिर उसकू हड़का के पूछा- काइकू! अभी तो तू लिया उसका नाम। वो बोला- भाई तुम्हारे दिमाग में केमिकल लोचा हो गयेला है क्या? अपुन ने तो अभी एक वर्ड तक नहीं बोला। उसकी बात सुनके अपुन ने गुस्से में चश्मा उतार के फेंका तो फिर से झटका लगा। ये क्या! चश्मा पहनके अपुन कू दूसरे के मन की बात मालूम चल रयेली है। गॉड ने अपुन के साथ कइसा जोक कियेला है। दूसरे के मन की बात जानने की तमन्ना तो अपुन कू पहले से इच थी। पन ये अहसास नहीं था कि जो लोग अपुन के सामने अपुन की बीन बजाते हैं वो अपुन के पीछू अपुन की कबर खोदने का प्लान भी बनाते रहते है! तभीच सर्किट याद आया।
अपुन ने सोचा कि चश्मा पहनके सर्किट के दिल का हाल भी जान इच लेगा पन फिर चश्मा कचरे की पेटी में डाल दिया। बोले तो सर्किट अपुन की जान है। अगर उसके मन की अइसी वइसी बात अपुन के भेजे में सूई के माफिक चुभ गई तो आगे की लाइफ भोत टफ हो जाएगीं। अपुन के बारे में जिसकू जो सोचना है सोच ले, सामने तो वो अपुन की इज्जत करता इच है। अपुन उसके झूठ के सहारे इच अक्खा लाइफ काट लेगा।
नमिता जोशी
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