रविवार, 4 नवंबर 2007

अक्खा दिन रोई दिल्ली

सर्किट और अपुन 2 दिन से खोली पे फुकेले बम के माफिक पड़ेले हैं। किदर भी हिलने-डुलने की हिम्मत नहीं हो रयेली है। बस्ती के किसी नए शाणे के डर के मारे नहीं, संडे कू जो अपुन दोनों की वाट लगी उसने अपुन दोनों की हवा निकाल दी। बोले तो संडे कू सुबह-सुबह उठके दोनों ने शप्पथ खाई थी कि मैराथन में भागेंगे। पन आई शप्पथ, ये शप्पथ तो भोत महंगी पड़ गई। सुबह से जो भागना शुरू किया तो रात तक भाग इच रयेले थे अपुन दोनों। बोले तो सुबह मैराथन ने भगाया। सर्किट तो पूरे ओवर कॉन्फिडेंस में खोली से निकला था। बोला, मुन्नाभाई अपुन बचपन में बस्ती की हर रेस में फर्स्ट आता था, ये तो वैसे भी हाफ मैराथन है। इसमें तो अपुन का गोल्ड मेडल पक्का इच समझो। सर्किट का ये जोश अपुन ने पहले कभी नहीं देखा था। इत्ते में बाजू की खोली से कल्लू कचरा आया और उसने सीक्रेट खोला तो भेजे में घुसा। बोले तो हाफ मैराथन में सर्किट की फेवरिट हीरोइन प्रियंका चोपड़ा आ रयेली है। पब्लिक कू चीयर अप करने के वास्ते। इस न्यूज कू सुनके सर्किट कई दिनों से चीयर अप हो रयेला था, ये बात अपुन के भेजे में काइकू नहीं घुसी। ओह अब सारी पिच्चर सर्किट के भेजे के माफिक अपुन के आंखों के आगे साफ-साफ तैर रयेली है। हाफ मैराथन में दौड़ने के वास्ते ये एक रात पहले से इच हाफ पैंट पहन के काइकू सो गया था। सुबह उठके लेट नहीं होना मांगता है न भाई। यइच बोलके अपुन कू टोपी पिन्हाया था सर्किट ने रात कू। अपुन मासूम उसकी बात में आ गया और संडे की छुट्टी का बाजा बजाने के वास्ते रेडी हो गया। वइसे सर्किट तो सोच रयेला था कि सुबह प्रियंका चोपड़ा के दर्शन करेगा और शाम कू उसके सपने लेगा पन सुबह हाफ मैराथन में हांफ हांफ के हाफ रूट भी कवर नहीं कर पाया सर्किट। अपने बारे में अपुन कू कोई गलतफैमिली नहीं था। अपुन तो कभी फर्स्ट आया नहीं था मोहल्ले की रेस में। हाफ मैराथन कू हाफ में इच छोड़के दोनों रोड के बाजू में बुझेली तीली के माफिक गिर गए। आंख खुली तो सीन देखके हैरान। दोपहर हो गयेली है और हाफ मैराथन अभी तलक चालू। सर्किट ने आंख से कीचड़ साफ किया और बोला-भाई ये तो फुल मैराथन दिख रयेली है। पब्लिक के हाथ में झंडे किदर से आ गये। अपुन ने भी देखा, हाफ मैराथन में ट्रैक सूट वाली पब्लिक बाद में धोती और साड़ी में कइसे चेंज हो गयेली है। तभीच पीछू से ट्रैफिक मामू का डंडा पड़ा। इदर से कल्टी हो जाओ। किसान लोग की रैली जा रही है। अपुन दोनों ने बाइक उठाई बाहर निकलने के वास्ते। पन इदर से बाहर निकलेंगे कइसे। ये रास्ता बंद, इदर से नहीं जाने का, उदर से नहीं जाने का...। अरे तो बाहर कइसे निकलें। मामू ने ये तो बोल दिया कि बाहर निकलो पन कल्टी मारने का रास्ता किदर से है, ये नहीं बताया। अपुन दोनों ने एक इच रास्ते के इत्ते चक्कर काटे की दोपहर से रात हो गई। इदर अपुन दोनों की एनर्जी खल्लास, उदर बाइक का पेट्रोल खल्लास। पेट्रोल भरा के खोली कू निकल रयेले थे पन गॉड कू मंजूर नहीं था। खोली के बाहर मंदिर के आगे करवा चौथ के वास्ते मेहंदी लगाने वाली लेडीज लोग ने ट्रैफिक जाम लगा के रखा था। इत्ती भीड़ देखके अपुन दोनों उदरइच फुकेले बम के माफिक ढेर हो गए।


28 october 2007, Half marathon and Janadesh rallies caused heavy trffic jam all around the delhi...

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