दो-तीन दिन से सर्किट खोली में दुबक के बैठेला है। जइसे पटाखे की आवाज सुनके गली के कुत्ते दुम दबाके कोने में छिप जाते हैं न, एकदम वइसे इच। अपुन ने पूछा - क्या हो गया है तेरेकू? अभी तो दीवाली भोत दूर है। बोले तो पटाखे का शोर तो अभी स्टार्ट भी नहीं हुआ, तू अभी से काइकू खाली-पीली खौफ खा रयेला है? वो बोला - मुन्ना भाई अपुन कू पटाखे का नहीं, एनकाउंटर का डर सता रयेला है। एनकाउंटर? अपुन ने पूछा कि ये एनकाउंटर वर्ड तेरे भेजे में किदर से आ गयेला है? राम गोपाल वर्मा की नई पिच्चर आ रयेली है क्या? वइसे रामू की आग देखने के बाद अपुन कू भी उसकी पिच्चर देखने से अब डर लगने लगा है पन एनकाउंटर पिच्चर के बारे में तो अपुन ने अभी तलक किसी चैनल में नहीं देखा। वो डरते डरते बोला - नहीं भाई, अपुन सच्ची के एनकाउंटर के बारे में बोल रयेला है। अपुन कू दशहरा के दिन से इच एनकाउंटर वर्ड का डर सता रयेला है। बोले तो दिल्ली की पब्लिक के मूड का कोई भरोसा नहीं है। अक्खा वर्ल्ड का क्राइम खल्लास करने के वास्ते कसम खाके बैठेली है। अपुन ने देखा था, दशहरा के दिन कोई ब्लूलाइन का रावण फूंक के एनकाउंटर कर रयेला था तो कोई अक्खा बुराई कू खतम करने का कसम खा रयेला था। लगता है, जइसे अक्खा विलेन लोग के पीछू पड़ गयेली है पब्लिक। सबकू खल्लास करके इच दम लेगी। अपुन भी नहीं बचेंगा। तुम भी बाजू के कमरे में छिप के बैठ जाओ मुन्ना भाई। बाहर निकलने में भोत डेंजर है। सर्किट का नॉन स्टॉप टेप जब खतम हुआ तो अपुन ने उसकू तसल्ली देना स्टार्ट किया। देख सर्किट, तू खाली-पीली डर रयेला है। ये दिल्ली है दिल्ली। न तो पब्लिक तेरेकू खल्लास कर सकती है और न इदर की पुलिस। तू भूल गयेला है क्या अपुन के धंधे में एनकाउंटर हर बार गलत आदमी का होता है। दिल्ली पुलिस के दस साल पुराने एनकाउंटर कू याद कर। मारना था किसी कू और खल्लास किसी और कू करके आ गये पुलिस वाले। इनकू अगर गलत आदमी का एनकाउंटर करना आता ना, तो रावण कब का मर गया होता! एक बार भगवान राम ने असली रावण का एनकाउंटर किया था लेकिन अब पब्लिक हर साल उस रावण का एनकाउंटर करने के चक्कर में मालूम नहीं किसकू उड़ा देती है। अगर असली रावण का एनकाउंटर करना इन लोग कू आता तो फिर ये हर साल काइकू रावण कू खल्लास करने के नाम पे इत्ता खर्चा करते। असली रावण कभी नहीं मरेंगा। ये बात अच्छी तरह समझ ले। अपुन जइसे रावण लोग जब इनकी पकड़ में आते हैं न तो उनका ये लोग कभी एनकाउंटर कर इच नहीं सकते। कित्ते सारे रावण जेल में सालों से बंद हैं। मालूम नहीं कित्ते साल तलक तो कोर्ट में केस चलता है। बोले तो कानून के घपले का फायदा कइसे उठाना है, ये इस देश के रावण लोग कू अच्छी तरह मालूम है। इसलिए डरने का नहीं, असली रावणों का कभी कोई एनकाउंटर नहीं कर सकता।
(दशहरा-2008 पर, कुछ दिन पहले ही सीपी एनकाउंटर केस पर अदालत ने दिल्ली पुलिस के 10 लोगों को कसूरवार ठहराया है)
सोमवार, 22 अक्टूबर 2007
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