मंगलवार, 16 अक्टूबर 2007
फोकट का लोचा
फुकेले बम के माफिक आजकल अपुन का भेजा भी फुक रयेला है। अपुन कू टेंशन में देखके सर्किट का टेप, प्ले का बटन दबाए बिनाइच चालू हो गया। वो अपुन के भेजे से भी जास्ती फुकेला गाना गाने लगा - जब कोई बात बिगड़ जाए, जब कोई मुश्किल पड़ जाए, उसके मूड कू देख के अपुन कू डर लगा तो अपुन ने बीच में टोक के पूछ डाला - सर्किट, ये गाना पूरा गाएंगा क्या? वो बोला मुन्ना भाई, पहले गाना सुनने का। फिर अक्खा जोर लगा के चीखा - जब कोई बात बिगड़ जाए, जब कोई मुश्किल पड़ जाए, तो तो तो तो ये पांच वर्ड बोलने का - ऐ गणपत, चल दारू ला। बोलो भाई, कइसा लगा अपुन का आइडिया? ये सड़ेला जोक सुन के दिल में तो आया कि उसका सर्किट फ्यूज कर दूं पन उससे अपुन के भेजे की प्रॉब्लम दूर थोड़ी होने वाली थी। उसकू बताया कि अपुन फोकट के लोचे में फंस गयेला है। अक्खा टेंशन की जड़ है ये मोबाइल फोन। चिंकी बोलती है अपुन कू रोज एसएमएस डालो वो भी कम से कम दस। ये वोइच चिंकी है जिसकू पटाने के वास्ते पहले दस क्या, मालूम नहीं कित्ते एसएमएस डालता था अपुन। बोले तो उस टाइम पे तो एसएमएस का रेट भी 3 रुपल्ली था। 3 रुपल्ली बोले तो एक कटिंग चाय, एक उबला अंडा, तंबाकू का एक पैकेट और 3 सिगरेट! सोचो, अपुन अक्खा वर्ल्ड की ऐश कर सकता था पन वो ये सब किदर समझती थी। अपुन का ये बलिदान उस टाइम में फोकट में वेस्ट हो रयेला था। पटने के भोत टाइम बाद वो अपुन कू बोली कि कोई और काम धंधा नहीं है क्या तुमकू? इत्ते एसएमएस नक्को डालने का। तुम्हारे पास भेजने का फोकट टाइम है तो तुम अपुन का टाइम काइकू खोटी करता है? अब तुम इच बोलो, पहले अपुन कू लुक्खा, फालतू और वो दिल्ली की लैंग्वेज में बोलते हैं न कि वेल्ला समझ रयेली थी और अब टाइम ने अइसा पलटी खाया। अपुन के पास रियली में टाइम नहीं है तो बोलती है कि अपुन कंजूस है। एक एसएमएस तक नहीं भेज सकता? अब तूइच बोल सर्किट, जो काम अपुन पहले करता था, उसके लिए वो अपुन कू वेल्ला का टाइटल देती थी और अब जब वो काम अपुन नहीं करता है तो कंजूस बोलके अपुन के दिमाग का दही कर रयेली है। है न फोकट का लोचा। तेरेकू तो मालूम इच है अभी अपुन का धंधा कित्ता मंदा चल रयेला है। इत्ता खर्चा किदर से उठाएंगा अपुन? सर्किट कू फर्स्ट टाइम अपुन ने सीरियस देखा। यकीन नहीं हुआ कि सर्किट सीरियस भी हो सकता है। एकदम ए. के. हंगल के माफिक थोबड़ा बनाके बोला - भाई अपुन के मोबाइल में आज इच एक एसएमएस की नई स्कीम आएली है। तुम वो इच स्कीम ले लो, टेंशन खल्लास! अपुन डर गया, उसके भेजे में एक स्कीम पक रयेली है। माफ कर, अपुन कू हजम नहीं होती तेरी स्कीम। एक गांधी बापू, बोले तो 5 सौ रुपल्ली का रिचार्ज कराने से दस साल की वैलिडिटी 5 हजार का टॉक टाइम और 50 हजार एसएमएस फ्री!!!! अपुन की आंखें मनोरमा के माफिक बाहर आ गई। अपुन ने सर्किट कू बड़े स्टाइल से बोला - ठीक है, आज इच चालू कर दे अपुन के फोन पे ये स्कीम। पन लगता है कि वो अपुन से किसी जनम का बदला ले रयेला था। बोला - भाई, ये स्कीम तो तुमकू खुद इच लगानी पड़ेगी। इसका वास्ते वेबसाइट खोलो - आगरा के पागलखाने से आयेला है क्या डॉट कॉम !!!!
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