शनिवार, 3 मई 2008

हटेले कू काइकू बजाया

सर्किट के मुंह के टेप में कभी कभी जब प्ले का बटन ऑन हो जाता है तो आई शप्पथ, दुनिया का कोई भी मिकैनिक उसकू स्टॉप नहीं कर सकता। आज मालूम नहीं किसने उसकी भैंस कू डंडा मारा है। अइसी सड़ेली गालियां दे रयेला था कि सुनके अपुन के कान में खुजली होने लगी। बोला- येड़े, हलकट, चंपक, चिरकुट, तेरे पिछवाड़े में खाज का रोग लग जाए और उसके बाद तेरे दोनों हाथ छोटे हो जाएं, ताकि तू अपने पिछवाड़े में चैन से खुजला भी ना सके।

हाइला, वइसे खाज के इस आइडिये की दाद देनी पड़ेगी। अइसी गंदी गाली सर्किट के इच भेजे में पक सकती है। गालियां तो अपुन भी देता है, पन अइसी गाली सुनके दुश्मन की कनपटी पे घोड़ा दबाने की जरूरत नहीं पड़ेंगी। इसकू सुनते इच किसी की भी वाट लग जाए। पन सर्किट, तू किसकी लाइफ बरबाद कर रयेला है, इत्ती गंदी गाली देकू।

मुन्ना भाई अपुन तो उस लक्की लुक्खे कू गालियां ठोंक रयेला है। उसने अक्खे गैंग की यूनिटी की वाट लगा दी है। अपुन सोच रयेला है कि इन लोग का आज से क्रिकेट मैच देखना बंद करवाएगा। बोले तो कल अक्खा गैंग जब शाम कू हफ्ता वसूल करके नोट गिन रयेला था तो उसने मालूम नहीं काइकू हन्नी हटेले के गाल पे एक झापड़ पिन्हा दिया। अपुन ने पूछा- क्या रे, काइकू खाली पीली भंकस करता है। यार दोस्त में हल्की फुल्की मारपीट तो चलती है। तू काइकू अपने ब्लड प्रेशर की सीटी बजा रयेला है। और अपुन कू ये बता कि इस सारे लफड़े में क्रिकेट मैच किदर से टपक गयेला है!

सर्किट बोला- मुन्ना भाई, दिन भर धंधा करके ये लुक्खे आजकल शाम के टाइम पे आईपीएल के मैच देख रयेले हैं। अपुन ने सोचा कि टाइमपास कर रयेले हैं। पन अपुन कू क्या मालूम था कि मैच देख के ये और भी बिगड़ जाएंगे। बोले तो उस दिन मैच के बाद हरभजन ने श्रीशांत कू ग्राउंड पे जो जम के पिन्हाया है गाल पे, उसकू देख के लक्की लुक्खे का भेजा घूमा। अपुन ने जब पूछा कि हटेले कू काइकू बजाया तो बोला कि जब इत्ता बड़ा क्रिकेटर अपनी टीम के मेंबर कू अक्खा वर्ल्ड के सामने बजा सकता है, तो अपुन काइकू नहीं। बोले तो ये हटेला भज्जी का फैन है और उसपे लगे बैन की बात सुनके रो रयेला था, इसका वास्ते अपुन ने उसकू घुमा के दिया।

अपुन ने बोला कि अइसे आपस में लड़के काइकू गैंग की वाट लगा रयेले हो? वो बोला कि जब भज्जी टीम इंडिया की यूनिटी की वाट लगा सकता है, अपने देश कू अक्खा वर्ल्ड में बदनाम करने का सुपारी ले सकता है तो फिर अपुन कौन सा बड़ा क्राइम कर रयेला है। वइसे भी दूसरों की इज्जत का फालूदा करने में भज्जी एक्सपर्ट है। पहले ऑस्टेलिया में साइमंड्स की भजिया तल कू आया। देश की इज्जत के वास्ते सबने उसकू बचा लिया पन टॉमी की पूंछ कभी सीधी नहीं होती। अब इधर अपनी टीम के मेंबर से बदतमीजी करके देश की नाक कटा दी ना।

सर्किट की ये स्टोरी सुनके अपुन ने उसकू बोला कि एक बदतमीज क्रिकेटर की वजह से काइकू अक्खा देश की नाक कटा रयेला है। वइसे भी जिसने लाफा खाया और जिसने खिलाया, वो दोनों इच इंटरनैशनल क्रिकेट खेलते वक्त अक्खा वर्ल्ड के प्लेयर के आगे बदतमीजी करते हैं। अपुन कू तो किसी से भी हमदर्दी नहीं है। मालूम नहीं खेल कू खेल की तरह खेलना इनकू कब आएगा।

नमिता जोशी

3 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

सच है खेल को खेल की तरह खेलने की कोचिंग देने के लिये भी कोच ही बुलवाना पड़ेगा. :)

Hill Goat ने कहा…

Why was this column discontinued in NBT?

नमिता जोशी ने कहा…

newspaper management and editor ki marji sir....