नमिता जोशी
सर्किट गली के कुत्ते के माफिक भाग-भाग के आया और अपुन से बाजू वाले कल्लन की खोली में चलने कू बोला। पर - क्यों, वाय, काइकू?? अपुन ने पूछा तो हिंदी फिल्मों का डायलॉग मारने लगा - मुन्ना भाई हर क्यों, वाय और काइकू का जवाब नहीं होता। इमरजेंसी में कल्लन तुमकू बुला रयेला है। अपुन सर्किट के साथ कल्लन की खोली में पौंचा तो क्या देखता कल्लन का छोकरा लल्लन भैया पैकिंग कर रयेला था। कल्लन ने अपुन कू देखतेइच बोला - अच्छा हुआ मुन्ना भाई, तुम इदर आ गये। अब तुम इसको समझाओ। ये मुंबई जाने के लिए पैकिंग कर रहा है।
अपुन ने लल्लन भैये से पूछा- काइकू अपने बूढ़े बाप कू हार्ट अटैक दे रयेला है?? वो बोला - मुन्ना भाई, अब मुझे गॉड भी नहीं रोक सकता हीरो बनने से। मैं मुंबई जा रहा हूं। फटे हुए जूते की तरह अपनी किस्मत का मुंह भी खुल रहा है। अब तुम बदबू वाला मोजा बनकर इसका ढक्कन बंद मत करो। सर्किट कू लल्लन भैये का ये डायलॉग सुनके दिल पे जोर की लगी और बोला - अबे, तू मुन्ना भाई कू बदबू वाला मोजा बोल रयेला है! तेरे भेजे की घास कू घोड़ा खा के चला गया है क्या?? अपुन ने सर्किट कू चुप कराके लल्लन कू बताया - देख लल्लन, तू अभी देश के किसी भी कोने में चला जा, पन मुंबई का सपना थोड़े दिन के वास्ते देखना छोड़ दे। तेरे कू मालूम नहीं, वहां सब मराठी भाई लोग भैया लोग के पीछू पड़ गयेले है। एक भाई मारपीट करवा रयेला है और दूसरा भाई भैया लोग कू मुंबई से पार्सल करने की शपथ खाके बैठेला है। वइसे भी तू उदर किसके घर में रहेंगा। कोई अरेंजमेंट कियेला है क्या??
लल्लन लपक के बोला - मेरा दोस्त है छोटे लाल। उसका फोन आया था। वो मेरे को उदर सेटल कर देगा। पहले छोटी-मोटी नौकरी दिलाएगा और बाद में फिल्मी स्टूडियो में जुगाड़ से एंटर करवा देगा। उसके बाद मैं और मेरा टैलेंट। अबे लल्लन, तेरे बाप ने तेरा नाम एकदम फिट रखेला है - लल्लन बोले तो लल्लू। तेरेकू मालूम नहीं, उदर के भाई लोग सिर्फ मराठी मानूस कू इच प्यार करते है। वो भाई जब बिग बी तक कू नहीं छोड़ रयेला है तो तेरेकू उदर कइसे काम करने देगा?? तेरे जइसे कू तो पहली नजर में पार्सल कर देंगे। वइसे भी मराठी भाषा आना मांगता है तेरेकू। तेरे बोलने का इश्टाइल नहीं चलेंगा उदर।
लल्लन के सिर पे तो मुंबई जाने का भूत सवार था। बोला - मुन्ना भाई, उसका इलाज भी है मेरे पास। जइसे विदेश का नागरिक बनने के लिए इंडियन लोग अंग्रेजी मेम से शादी करते हैं न, मैं भी वैसा ही करूंगा। मराठी छोरी से मैं भी शादी बनाउंगा और फिर उससे मराठी सीख के मराठी मानूस बन जाउंगा। गरम चाय में बिस्कुट के माफिक पिघल के मिल जाउंगा मुंबई में। वेरी सिंपल! लल्लन भैये का कॉन्फिडेंस देखके अपुन सर्किट के साथ कल्लन की खोली से बाहर आ गया। वइसे भी इंडिया आजाद है, उसमें किसी कू किदर भी जाने से रोकने वाला अपुन कौन होता है।
देखना तो ये है कि इस फाइट में जीत किसकी होती है भाई लोग की या भैया लोग की।
गुरुवार, 14 फ़रवरी 2008
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