वो पूछा- आपकी तारीफ! अपुन बोला, ये तारीफ का टाइम नहीं है। जास्ती भंकस नहीं करने का क्या! चुपचाप हफ्ता ढीला कर, वरना तेरे जबड़े से दो दांत ढीले कर देगा।
हाइला! अपुन की हूल सुनके भी वो कूल है। बोला-भाई, सुबह से एक भी कस्टमर नहीं आया है। चाहो तो अपुन की दुकान का ये सबसे चकाचक चश्मा तुम रख लो। अगले हफ्ते आकर डबल हफ्ता ले जाना और ये चश्मा इदर फेंक जाना। अपुन ने वो चश्मा ले इच लिया और उदर इच उसका उद्घाटन कर दिया।
शाम कू खोली पे लौटा, तो जैसे बैकग्राउंड से आवाज आई। वहां हकला हज्जाम अपने जूते जइसे मुंह कू फाड़ के चवन्नी छाप स्माइल दे रयेला था। अभी तो इसने अपने मोजे जइसी जीभ बाहर भी नहीं निकाली, तो फिर ये उसकी आवाज निकाल के अपुन कू कौन गाली दे रयेला है! फिर वोइच आवाज आई- आ गया साला मुन्ना। काला चश्मा लगाके खुद को हीरो समझ रयेला है, पन दिखता पूरा बंदर है। आज जब तलक ये खोली का भाड़ा नहीं चुका देता, अपुन इसकी खाट से खटमल के माफिक चिपक कर बइठा रहेगा। हाइला! ये कौन बोला? ये सवाल सुनके हकला एकदम डर गया। बोला - अरे आओ आओ मुन्ना भाई। तुम्हारी उमर भोत लंबी है। अभी अपुन तुमकू इच याद कर रयेला था। याद कर रयेला था! दिल में अपुन के वास्ते इत्ता जहर भरके बैठेला है और सामने से अपुन कू मस्का लगा रयेला है। पन उसके मन की बात अपुन कू कइसे सुनाई दी।
अइसा तो खाली एकता कपूर के टीवी सीरियल में होता है। सारे कैरेक्टर आपस में मुंह से बात कम करते हैं और मन में जास्ती। अइसे इच पूरा आंधा घंटा निकल जाता है और सीरियल खल्लास। पन अपुन की लाइफ का सीरियल तो अब चालू हुआ था।
अचानक अज्जू कड़वे ने भी खोली में अवतार लिया। अपुन कुछ पूछता, उससे पहले इच उसकी साउंड भेजे में घुसी। बोल रयेला था - साले मुन्ना, कब तलक अपुन लोग की छाती में मूंग दलेगा। इत्ती गर्मी में वसूली करने के वास्ते अपुन कू भेजता है और शाम कू अक्खे गैंग के खून पसीने की कमाई अपनी पॉकेट में। आज तू देख, अक्खे गैंग के साथ मिलके तेरे कू ठिकाने लगाने का सॉलिड प्लान बनाता है। बस सर्किट आ जाए। सर्किट किदर से आ जाए? अपुन ने अज्जू कड़वे से पूछा तो वो डर के बोला- अरे भाई, अपुन कू क्या मालूम सर्किट के बारे में।
अपुन ने फिर उसकू हड़का के पूछा- काइकू! अभी तो तू लिया उसका नाम। वो बोला- भाई तुम्हारे दिमाग में केमिकल लोचा हो गयेला है क्या? अपुन ने तो अभी एक वर्ड तक नहीं बोला। उसकी बात सुनके अपुन ने गुस्से में चश्मा उतार के फेंका तो फिर से झटका लगा। ये क्या! चश्मा पहनके अपुन कू दूसरे के मन की बात मालूम चल रयेली है। गॉड ने अपुन के साथ कइसा जोक कियेला है। दूसरे के मन की बात जानने की तमन्ना तो अपुन कू पहले से इच थी। पन ये अहसास नहीं था कि जो लोग अपुन के सामने अपुन की बीन बजाते हैं वो अपुन के पीछू अपुन की कबर खोदने का प्लान भी बनाते रहते है! तभीच सर्किट याद आया।
अपुन ने सोचा कि चश्मा पहनके सर्किट के दिल का हाल भी जान इच लेगा पन फिर चश्मा कचरे की पेटी में डाल दिया। बोले तो सर्किट अपुन की जान है। अगर उसके मन की अइसी वइसी बात अपुन के भेजे में सूई के माफिक चुभ गई तो आगे की लाइफ भोत टफ हो जाएगीं। अपुन के बारे में जिसकू जो सोचना है सोच ले, सामने तो वो अपुन की इज्जत करता इच है। अपुन उसके झूठ के सहारे इच अक्खा लाइफ काट लेगा।
नमिता जोशी
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1 टिप्पणी:
bahut badhiya anand aa gaya Tapori ji ko sunakar
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