सर्किट आजकल रोज बिना छिलके के केले के माफिक चिकना बनके तैयार हो रयेला है। अपुन ने पूछा तो बोला कि मुन्ना भाई तुमकू मालूम होना मांगता है कि अपुन किसी भी दिन या तो टीम इंडिया में सिलेक्ट होने वाला है या फिर दिल्ली कू सलाम करके बॉलिवुड का रास्ता पकड़ने वाला है। हाइला! वो कइसे! तेरा कोई सगेवाला बीसीसीआई सिलेक्टर या किसी फिल्मी प्रोडयूसर के घर नौकर लग गयेला है क्या, जो तू इत्ते बड़े-बड़े सपने देख रयेला है?
सर्किट बोला - मुन्ना भाई, अपुन ने टीवी में ऐड देखेला है - चला चेंज का चक्कर! अगर अपुन का इनाम आ गया ना, तो एक दिन के लिए अपुन टीम इंडिया का प्लेयर बन जाएंगा और वो प्लेयर तुम्हारे असिस्टेंट यानी सर्किट का रोल करेंगा। सर्किट की बात अपुन के भेजे के घड़े में दही के माफिक जम गई। खोली पे पहुंचा तो अपुन के छोटे से भेजे ने उस दही की लस्सी बनानी स्टार्ट कर दी। हाइला ये क्या! ये तो अपुन की निकल पड़ी! एक दिन के वास्ते अपुन बन गया धोनी। चलो, एक दिन के वास्ते
इच सही, अपुन की बारिश में सीली हुई तीली के माफिक लाइफ में ये टीवी ऐड ने कुछ तो जान डाली।
सर्किट के माफिक अपुन भी चकाचक चिकना बनके तैयार हुआ। इदर अपुन पहुंचा टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम और धोनी पहुंचा अपुन की खोली। एक दिन का राजा बनने की शान ही कुछ और होगी। धोनी का अक्खा माल अपुन का, विदेशी मोटरसाइकल पे अक्खा दिन सैर कर करके उसके टायर घिस डालेंगा अपुन। कोई टीवी चैनल वाला भी देश की सारी प्रॉब्लम्स भूल के अपुन कू जरूर अपने स्टूडियो में बइठाएगा और अक्खा दिन डिस्कशन करेंगा। और हां, ये भी तो हो सकता है कि आईपीएल वाले धोनी की नीलामी वाली रकम का चेक उस दिन अपुन कू पकड़ा दे। वाह! क्या लाइफ है धोनी की। वापस लौट के अपुन कब गैंग लीडर से बस्ती का हीरो बन जाएगा, पता इच नहीं चलेंगा।
खैर, ड्रेसिंग रूम पहुंचते इच मालूम चला कि अपुन का मैच पाकिस्तान की टीम से है और ओपनिंग करने के वास्ते कोच धोनी कू भेजना चाहते हैं। नहीं, अपुन नहीं जाएगा ओपनिंग करने। बड़े-बड़े सीनियर प्लेयर्स ने क्या चूडि़यां पहन के रखी हैं जो अपुन कू रावलपिंडी एक्सप्रेस का शिकार बनाने के वास्ते आगे कर रयेले हो। अपुन के सवाल के जवाब में मैनेजर बोला - अरे धोनी जी आपने ही तो टीम के सारे सीनियर मेंबर्स कू घर भेजके नए चिकने छोकरे टीम में रखवाए हैं। अब तो टीम में सबसे सीनियर होने के नाते आपको इच मैदान में जाके दुश्मन का मुकाबला करना पड़ेंगा।
पहली बॉल में बोल्ड होके ड्रेसिंग रूम में लौटा तो एक टीवी चैनल से फोन आया। चलो गेम नहीं खेल पाया तो क्या हुआ, टीवी पे आके रातोंरात स्टार तो बन इच जाएगा ये मुन्ना भाई। ये सोच के फोन उठाया तो पता चला कि धोनी बनना इत्ता आसान नहीं। उसकी सारी पनौतियां अपुन के सिर पे इच पड़ने वाली हैं, ये अपुन कू बिल्कुल भी नहीं मालूम था। चैनल वाले अपुन से मंदिर में बकरे की बलि के बारे में सवाल करने लगे। धोनी के किए की सजा के बारे में अपुन से डिस्कस करने लगे। समाज, जिम्मेदारी, कर्तव्य टाइप के पहाड़ जइसे शब्दों ने अपुन का भेजा घुमा दिया।
फर्स्ट टाइम लगा कि सिलेब्रिटी बनना इत्ता आसान नहीं है, जित्ता अपुन सोचते हैं। एक बात तो अपुन के भेजे में नहीं घुसी की पढ़ लिख के भी लोग अइसे अंधविश्वास में कइसे पड़ जाते हैं। और जान आफत में आ गई अपुन की। तभीच अपुन का मोबाइल बजा। दूसरे चैनल का एंकर भी अपुन से वोइच पूछ रयेला था - धोनी ये तूने क्या किया! धोनी तूने क्या किया! सवाल का जवाब ढूंढते ढूंढते अपुन का अक्खा बॉडी से अइसे पसीना टपक रयेला था, जइसे बरसात में अपुन की खोली टपकती है। पसीना पोंछने के वास्ते हाथ ऊपर किया तो नींद टूट गई और और क्या देखता है! खोली सच्ची मुच्ची में टपक रयेली थी और अपुन खोली की खटिया पे चादर के माफिक फैल के सो रयेला था। थैंक गॉड अपुन मुन्ना भाई है, धोनी नहीं।
नमिता जोशी
शनिवार, 29 मार्च 2008
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1 टिप्पणी:
बढिया है !
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