अज्जू कडवे का मूड भोत दिन से गोबर में फंसे तलवे के माफिक है। जब से अपुन की टीम का हॉकी के ओलंपिक से भग ले इंडिया हुआ है, तब से कड़वे के थोबड़े की लाइट डिम है।
बोले तो हॉकी का भोत बड़ा फैन है न और जब से किंग खान ने चक दे इंडिया में हॉकी कू सुपरगेम बनाया तब से तो इसने क्रिकेट के बल्ले से कपड़े धोना चालू कर दिएला था। पन अब सीन चेंज हो गयेला है, एकदम एकता कपूर के सीरियल के माफिक। अपुन कू तो उससे इस टॉपिक पर बात करने में डर लग रयेला है।
सर्किट के भेजे की वोल्टेज में हलचल हुई तो उसने कड़वे से पूछ डाला - काइकू अस्सी साल के बूढ़े गेम पे अपने आंसू वेस्ट कर रयेला है! नैशनल गेम का नाश तो अपुन जइसी पब्लिक ने इच मारा है तो फिर रोने का काइकू! वइसे भी तू जिस चक दे इंडिया पिच्चर कू देखके हॉकी का फैन बनेला है ना, उसका हीरो किंग खान ने भी हॉकी पे बनी उस पिच्चर से कमाया अक्खा पइसा क्रिकेट टीम कू खरीदने में फूंक डाला है। देखा नहीं, कइसे हॉकी पे बनी फिलम का टाइटल सॉन्ग अक्खा देश की पब्लिक ने क्रिकेट के नाम कर दिया! जब भी टीम इंडिया मैच जीतती है तो अक्खा दिन टीवी पे यइच गाना तो बजता है।
अपुन कू तो कभी-कभी अइसा लगता है कि वो दिन भी जास्ती दूर नहीं है, जब पब्लिक हॉकी के बदले क्रिकेट कू नैशनल गेम बना डालेंगी और छोटे बच्चों से जब उनके मम्मी पापा मेहमान लोग के आगे नैशनल एंथम गाने कू बोलेंगे तो वो चक दे इंडिया का राग स्टार्ट कर देंगे। सर्किट सिरफिरे की बात सुनके भी कड़वे पे कोई असर नहीं पड़ा।
दोनों की बक-बक सुनके अइसा लग रयेला था कि अपुन ने कोई न्यूज चैनल खोला है और उदर दो आदमी एक्सपर्ट बनके पब्लिक कू येड़ा बना रयेले है। कड़वा फिर बोला - अक्खा मिस्टेक ये क्रिकेट की है। इस सड़ेले गेम कू अक्खा वर्ल्ड के दस देश भी नहीं खेलते। फिर भी सरकार से लेकर हीरो-हीरोइन तलक सब के सब इसमें इच दांव लगा रयेले हैं। हॉकी के प्लेयर किस पेड़ की लकड़ी से गेम खेलने फील्ड में उतरते हैं, ये किसी कू मालूम नहीं होगा। अपुन तो कहता है कि सरकार तो क्या, मीडिया का भी उत्ता इच मिस्टेक है। क्रिकेट के अलावा जब किसी दूसरे गेम में कोई जीतता है तो टीवी पे पांच मिनट का प्रोग्राम नहीं आता और जब हार के आते हैं तो उनकी बरात निकालने में घंटों लगा देते हैं।
और सबसे बड़ा क्रिमिनल तो वो गिल है, जो इत्ते साल तक हॉकी के हेड पे सवार था पन उसके बारे में सोचा तक नहीं। अपुन कू तो यकीन इच नहीं होता कि ये वोइच आदमी जिसने पंजाब में आतंकवादी लोग कू कपड़े में से मैल के माफिक साफ कर दिया। क्या मालूम था कि वो हॉकी कू भी देथ के नक्शे से वइसे इच साफ करके दम लेंगा! सर्किट और कड़वे की बक-बक पे फुल स्टॉप लगाने के वास्ते अपुन ने बोलना चालू कर दिया। ठीक वइसे इच जइसे ब्रेक पे जाने से पहले न्यूज प्रोग्राम का एंकर सबकू चुप कराता है। देखो अब अपुन जइसी पब्लिक के रोने से तो गेम का भला होगा नहीं और क्रिकेट पे सारी गलती डालके कोई अपना पीछा नहीं छुड़ा सकता।
गेम में पब्लिक का इंटरेस्ट पइदा करने के वास्ते भोत कुछ करना पड़ेगा। वइसे भी जरूरी नहीं है कि जो गेम अस्सी साल पहले खेलने में अपुन लोग चैंपियन थे, उसमें आज भी चैंपियन हों। ये भी देखना पड़ेंगा कि अस्सी साल पहले जित्ते देश ये गेम खेलते थे, उनमें से कित्ते देश अभी भी वो गेम खेलते हैं। अक्खा वर्ल्ड बदल रयेला है तो फिर अपुन कब तक ये थकान की दुकान खोलके रखेंगे।
नमिता जोशी
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2 टिप्पणियां:
भौत बढ़िया. वैसे एक नई बात पता चली है कि लोगों का इन्ट्रेस्ट हॉकी में न सही हॉकी की हार में तो है. देश का और देश भर के मिडिया का ध्यान फिलहाल हॉकी (की हार) पर है.
अज्जू कडवे का मूड ठीक हो जाये, तो बताना जरुर. :)
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