शुक्रवार, 21 मार्च 2008

टेंशन देने का, लेने का नहीं

तूने दिल का हाल बताना छोड़ दिया, अपुन ने भी गहराई में जाना छोड़ दिया, अभी तो होली में एक दिन बाकी है, ऐ सर्किट तूने अभी से इच नहाना छोड़ दिया!


होली अपुन का फेवरेट फेस्टिवल है। बोले तो भांग पीने का लाइसेंस तो मिलता इच है फोकट में, पन अंदर की बात तो ये है कि ठंडे पानी से नहाने की स्टार्टिंग अपुन इसी दिन से करता है। कोई सनकी खोपड़ी ठंडे पानी की बाल्टी अपुन पे डाल देता है तो सर्दी का मेनिया फुर्र हो जाता है। पन मालूम नहीं ये सर्किट सिरफिरे कू क्या हो गयेला है। कुछ दिन पहले आफत का भूत इसके भेजे की खोली में किराएदार बनके आएला है। तब से पढ़ने लिखने के बारे में सीरियस हो गया। बोला इस बार दसवीं पास करके इच छोड़ेंगा। अपुन ने भोत मना किया। ये पढ़ाई लिखाई ब्रेड में मस्का लगाने या घोड़ा दबाने के माफिक ईजी नहीं है। गॉड ने तेरेकू टेंशन देने के वास्ते पैदा किएला है, टेंशन लेने के वास्ते नहीं। इसलिए किडनी पे जास्ती जोर नहीं डालने का।


पन सर्किट सिरफिरे ने एक बार जो फैसला कर लिया, तो समझो गॉड भी आके उसका फ्यूज नहीं उड़ा सकता। अपुन ने भी सोचा, चलो लाइफ में फर्स्ट टाइम कुछ अच्छा करने का आइडिया आयेला है, तो बीच में टांग नहीं अड़ाता। एग्जाम टाइम में वइसे मेहनत भी भोत किया सर्किट। इत्ता मेहनत तो इसने गैंग के वास्ते शिकार ढूंढने में कभी नहीं किया। पन ये क्या! तीन दिन पहले जो एग्जाम देकर आया, उसके बाद से खोली में लॉक हो गयेला है। न खाना पीना न नहाना धोना। कल्लू कल्लन बोला - मुन्ना भाई, टेंशन नहीं लेने का, जरूर ये होली की तैयारी कर रयेला होएंगा।


नहीं, अइसा नहीं हो सकता। अपुन दरवाजा ठोंक के अंदर घुसा तो देखा सर्किट सुसाइड करने का सामान इकट्ठा करके बैठेला था। उसके हाथ में रस्सी देखके अपुन तो अंदर तक हिल गया। बड़ी मुश्किल से उसकू समझाया तो वो बोला भाई अपुन इस बार भी शरीफ आदमी बनने से रह गया। अक्खा पेपर खराब करके आ गया। बोले तो सवाल इच इत्ता कन्फयूजिंग था - अमेरिका में प्रेजिडेंट के वास्ते खड़ेले कैंडिडेट के बारे में पूछेला था। अपुन ने ओबामा के बदले ओसामा लिख दिया। बोले तो गलती अपुन की नहीं है। वो ओबामा के मां-बाप की है। उसका नाम दो-दो वर्ल्ड फेमस डॉन के नाम पे किसने रखने कू बोला था। उससे पहले अपुन सद्दाम हुसैन लिखने वाला था, क्योंकि बराक ओबामा के बीच में हुसैन भी आता है। बराक हुसैन ओबामा। अपुन जइसे पंटर का भेजा घूमेगा नहीं तो क्या होगा! जइसे इच सद्दाम हुसैन लिखने वाला था कि याद आया उसकू तो एक साल पहले फांसी पे लटका दिया था। फिर अपनी इच बिरादरी के सबसे बड़े भाई ओसामा का नाम याद आया और लिख डाला ओसामा पर निबंध। इत्ता लंबा लंबा फेंक के आया कि चेक करने वाले के लिए लपेटना मुश्किल हो जाएंगा।


इत्ते अंडे मिलेंगे जित्ते बाजू के पोल्टरी फार्म की मुर्गिंया भी नहीं देती होगी। इस भाईगीरी ने अपुन के भेजे में अइसा घुसपैठ किया है कि हर आदमी अपुन कू अपने जइसा इच लगता है। अमेरिका के सबसे बड़े दुश्मन ओसामा कू अमेरिका का सबसे बड़ा आदमी बना दिया अपुन ने। अपुन कू भी अब सद्दाम हुसैन के माफिक रस्सी पे झूल के इच मुक्ति मिलेगी। भाई अपुन कभी बडा़ आदमी नहीं बन सकता।


नमिता जोशी

4 टिप्‍पणियां:

राज भाटिय़ा ने कहा…

अरे मेने देखे तो नही ( भगवान ना ही दिखाये) टपोरी सुने बहुत हे, आज पहली बार टपोरोन का लेख पढा, तो जी आप को दुर दुर से ही होली की शुभ्कामन्ये

सागर नाहर ने कहा…

अरे,,, सर्किट इतना निराश कब से होने लगा? :)
खैर लेख मजेदार रहा।
॥दस्तक॥
गीतों की महफिल
तकनीकी दस्तक

Tarun ने कहा…

अमा क्या केरिये हो लगे हाथ ये भी बता देते कि टेंशन दोनों हाथों से देने का एक हाथ से नही, क्योंकि एक हाथ खाली रहा तो कोई दूसरा अपना टेंशन थमा जायेगा। मस्त आईटम है बाप, अरे अपुन टपोरी की इस पोस्ट के लिये बोल रिया है। होली मुबारक

राजीव जैन ने कहा…

अपन तो पहली बार आपके ब्‍लॉग पर आए
यूं तो हिंदी भाषी है, मराठी स्‍टाइल में पढने में थोडी मशक्‍कत करनी पडी पर फ़लो अच्‍छा है, आदमी अटकता नहीं।
दिल्‍ली की है, मुंबइया स्‍टाइल में लिखती हैं
कुछ समझ नहीं आया।